फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रस्ताव सरकार की ओर से पहले आया, हमने नहीं की थी बात : अनिल

विज्ञापन
200 बेड के अस्पताल की स्थापना को लेकर धरने पर बैठे लोग। स्रोत : समिति
विज्ञापन
रेवाड़ी। 200 बेड के अस्पताल की स्थापना को लेकर रामगढ़ भगवानपुर संघर्ष कमेटी का धरना जारी रहा है। धरने की अध्यक्षता राव लाल सिंह ने की। आंदोलन में क्षेत्र के दर्जनों गांवों से महिलाओं और पुरुषों की बढ़ती भागीदारी ने जनआंदोलन का रूप ले लिया है। कैंडल मार्च और जन जागरण अभियान के जरिए लगातार गांव-गांव से समर्थन जुटाया जा रहा है।
विज्ञापन

गांव बुडाना की महिलाएं विवाह गीतों की तर्ज पर गीत गाते हुए धरना स्थल पर पहुंची जिससे माहौल एक ओर जहां सांस्कृतिक हुआ, वहीं यह प्रदर्शन संघर्ष और लोकशक्ति का प्रतीक बन गया।
अनिल कुमार ने मंच से कहा कि जब तक सरकार भगवानपुर में अस्पताल बनाने की मांग को स्वीकार नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि भगवानपुर की जमीन सबसे उपयुक्त है जो एनएच-71 से सटी है। तीन तरफ से रास्ते हैं और नया प्रस्तावित बस स्टैंड केवल दो किलोमीटर दूर है।
विज्ञापन

अनिल कुमार ने बताया कि यह प्रस्ताव सरकार की ओर से ही पहले आया था, न कि ग्रामीणों ने अपनी तरफ से जमीन की मांग की थी। उन्होंने हरियाणा सरकार के स्वास्थ्य मंत्री पर सवाल उठाते हुए कहा कि विधानसभा में मंत्री ने अस्पताल व ट्रॉमा सेंटर के लिए 22 कनाल और 14 कनाल जमीन होने की बात कही थी लेकिन अब वही जमीन 8.5 एकड़ बताई जा रही है जो भ्रम पैदा करती है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि अस्पताल को शहर से बाहर स्थानांतरित करने का निर्णय पहले ही लिया गया था तो फिर पुराने स्थान को बनाए रखने का औचित्य क्या है।
आंदोलन जारी रहेगा
अनिल कुमार ने कि यह अस्पताल तो बनकर ही रहेगा, लेकिन जब तक हमारे बुजुर्गों के आत्मसम्मान की बहाली नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। यदि इसके लिए मेरे प्राणों का बलिदान भी देना पड़े तो मैं पीछे नहीं हटूंगा। यह आंदोलन न केवल स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग है बल्कि जनता की इच्छाशक्ति और जनसहभागिता का प्रतीक बन चुका है जो सरकार को स्पष्ट संदेश दे रहा है। धरने में रामगढ़ भगवानपुर, तुर्कियावास, बुड़ाना, बुड़ानी, फिदेड़ी, सुनारिया, फदनी, मीरपुर, मांढैया कला, गोकलपुर, डाबड़ी, डोहकी, मुंढलिया, ढाकिया फदनी, बालियर खुर्द, मांढैया कला समेत दर्जनों गांवों के लोग शामिल रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें