रेवाड़ी। 18 दिन से भवन निर्माण श्रमिकों की रोजी-रोटी पर छाया हुआ संकट ग्रैप-4 की पाबंदी हटने के बाद अब खत्म हो चुका है। जिले में 20 हजार से अधिक भवन निर्माण श्रमिक हैं। इनमें 10,084 श्रमिक ही पंजीकृत हैं। जानकारी के अभाव में बाकी श्रमिक पंजीकृत नहीं है।
जो पंजीकृत श्रमिक थे, ग्रैप-4 की पाबंदी के दौरान प्रति सप्ताह उनके खाते में 2,539 रुपये डाले गए। मगर जो श्रमिक पंजीकृत नहीं थे, उनके लिए काफी अधिक समस्या रही। श्रमिक रोजाना की दिहाड़ी पर निर्भर होते हैं। ग्रैप की पाबंदी के बाद ठेकेदारों की तरफ से दो-तीन दिन तक श्रमिकों को पैसा खाली बैठने पर दिया गया था। मगर जब देखा कि ग्रैप-4 की पाबंदी अभी नहीं हटने वाली है तो उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए थे।
उसके बाद श्रमिक धीरे-धीरे प्रदेश वापस लौट गए। मौजूदा समय में 20 हजार में से करीब 80% श्रमिक अपने राज्योंको लौट चुके हैं। ग्रैप-4 की पाबंदी हटने की खबर मिलने के बाद श्रमिकों ने अब आना शुरू कर दिया है। इन 18 दिनों में 200 करोड़ से अधिक का निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है। अब तीन-चार दिन के अंदर श्रमिक काम पर लौट आएंगे। जिले में सबसे ज्यादा श्रमिक यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड से आते हैं।
सोलहाराही तालाब के निर्माण में लगे श्रमिक चले गए घर
यूपी के झांसी निवासी सीताराम ने बताया कि वह सोलहाराही तालाब में निर्माण का कार्य करता है। उसके साथ उसी के जिले के 50 श्रमिक और कार्य करते थे। मौजूदा समय में अधिकतर अपने घर लौट चुके हैं। तीन-चार दिन के अंदर सभी कार्य पर लौट आएंगे। श्रमिक दिनेश, विनोद और राजू ने बताया कि वह भवन निर्माण का कार्य करते हैं। पता चला कि ग्रैप 4 की पाबंदी हट चुकी है। शुक्रवार को वह उत्तर प्रदेश से रेवाड़ी में कामकाज के लिए लौटे हैं। श्रमिकों ने बताया कि 18 दिन बैठकर खाली यहां पर क्या करते, क्योंकि गुजर बसर मुश्किल हो रहा था।
3 साल में पहली बार ग्रैप-4 की अधिक समय तक लगी पाबंदी
दूसरी तरफ 3 साल में पहली बार अधिक दिनों तक ग्रैप चार की पाबंदियां इस साल लगी हैं। 2022 में 3 से 6 नवंबर, 2023 में 5 से 18 नवंबर तक ग्रैप चार की पाबंदियां लगी थी। इस वर्ष 2024 में ग्रैप-4 की पाबंदियां 17 नवंबर से लगाई गई थी जो कि अब तक जारी है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि इस सीजन में अधिकतम प्रदूषण का स्तर 449 के पास पहुंच गया था। जोकि काफी गंभीर श्रेणी में माना जाता है।
हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर परिषद ने मिलकर की कुल कार्रवाई
अब ग्रैप 2 की पाबंदियां लगाई गई हैं। नवंबर माह में हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए 30 लाख से अधिक का जुर्माना लगाया है। 50 डीजी सेट (जनरेटर) भी सील किए हैं। साथ ही 6 कंपनियों को सील करने के लिए पत्र उच्च अधिकारियों को भेजा गया है। नगर परिषद की तरफ से की गई कार्रवाई की बात करें तो खुले में कूड़ा जलाने, कंस्ट्रक्शन साइट पर तथा होटल में ढाबों पर लकड़ी व कोयला जलाने वालों के अभी तक 100 से अधिक चालान कर ढाई लाख से अधिक का जुर्माना लगाया है।
पिछले दिनों का प्रदूषण का स्तर
दिन, एक्यूआई
6 दिसंबर 90
5 दिसंबर 80
4 दिसंबर 134
3 दिसंबर 235
2 दिसंबर 175
2 दिसंबर 196
प्रदूषण का स्तर सुधरने के बाद ग्रैप चार की पाबंदियों को हटा दिया गया है। फिर भी लोगों से अपील है कि खुले में कूड़ा ना जलाएं। ऐसे में फिर से प्रदूषण फैल सकता है।
-हरीश, आरओ, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, रेवाड़ी।
भवन निर्माण के करीब 10 हजार श्रमिक पंजीकृत हैं। श्रमिकों को भत्ता तो मिल चुका है, मगर कई श्रमिक ऐसे हैं जिनका पंजीकरण दोबारा नहीं हो पाया। जब सरकारी कार्यालय में जाते हैं तो अधिकारी जल्दी सी साइन ही नहीं करते हैं। काफी समस्या होती है। इसका समाधान हो तो श्रमिकों को काफी राहत हो जाएगी।
-अशोक कुम्भावास, जिला प्रधान, भवन निर्माण कारीगर मजदूर यूनियन।