रेवाड़ी। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जोगिंद्री की अदालत ने फैक्टरी अधिनियम 1948 के प्रावधानों का उल्लंघन करने के मामले में बावल स्थित एक इंजीनियरिंग लिमिटेड कंपनी 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
कोर्ट ने सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के दो मामलों में कंपनी पर 5-5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। कंपनी ने अदालत में जुर्माना अदा कर दिया। 24 मार्च 2025 को सहायक निदेशक औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य ने कंपनी के प्लांट का निरीक्षण किया था।
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कंपनी ने फैक्टरी अधिनियम की धारा 7ए से संबंधित सुरक्षा प्रावधानों का ठीक से पालन नहीं किया है। यह उल्लंघन अधिनियम की धारा 92 के तहत दंडनीय माना गया। इसके बाद विभाग ने अदालत में शिकायत दाखिल की।
शिकायत पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 22 जुलाई 2025 को कंपनी को समन जारी किया। इसके बाद कंपनी की ओर से अधिकृत प्रतिनिधि अदालत में पेश हुए। उन्हें शिकायत और दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराई गईं।
सुनवाई के दौरान कंपनी के प्रतिनिधि ने अदालत के समक्ष पेश होकर दोषी होने की बात स्वीकार की। कंपनी की तरफ यह दलील दी कि पाई गई कमियों को सुधार लिया गया है। भविष्य में सभी नियमों का पालन किया जाएगा।
अदालत ने साफ कहा कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है। इसलिए कंपनियों को पूरी जिम्मेदारी के साथ कानून का पालन करना होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षा नियमों का पालन न करना गंभीर अपराध माना जाएगा।
पूरे प्रकरण ने औद्योगिक संस्थानों के लिए यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी प्रावधानों की अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगी। कानून का उल्लंघन करने पर कंपनियों को दंड भुगतना ही पड़ेगा।