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टेकचंद की मां बोलीं, तिरंगा लेकर देश का नेतृत्व कर बेटे ने उतारा दूध का कर्ज

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घर में टीवी पर टेकचंद को देखते परिजन। - फोटो : Rewari
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रेवाड़ी। टोक्यो में पैरालंपिक के उद्घाटन समारोह में बावल निवासी खिलाड़ी टेकचंद को ध्वजवाहक के रूप में भारतीय दल का नेतृत्व करते उनकी देख मां विद्या देवी ने कहा कि आज बेटे ने दूध का कर्ज पूरा कर दिया। विद्या देवी बोली बेटा 7 साल तक बिस्तर पर था। देश का झंडा हाथ में देखकर बेटे पर गर्व हो रहा है।
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बता दें कि इसी सप्ताह को होने वाले मुकाबले में टेकचंद ईरानी खिलाड़ी को देसी घी का दम दिखाएंगे। बावल शहर में उद्घाटन समारोह का लेकर खुशी का माहौल रहा। जिले के उद्घाटन समारोह से पहले ही टीवी से चिपके रहे। भारत के समय अनुसार साढ़े चार बजे होने वाले समारोह से पहले ही आसपास के लोग टेकचंद घर पहुंचने लगे। देखते-देखते उनके घर काफी भीड़ इकट्ठा हो गई। मां विद्या देवी ने बताया कि मंगलवार को दोपहर के समय भारत के समय अनुसार एक बजे ही बेटे से बात हुई थी। बेटे ने कहा मां आप बीमार रहती हैं, मेरी चिंता मत करना। यहां का माहौल काफी अच्छा है। मैं अच्छी तैयारी कर रहा हूं। इस बार देश के लिए गोल्ड मेडल लाऊंगा। टेकचंद की मां ने बताया कि एक छोटे शहर का दिव्यांग बेटा इतने खिलाड़ियों के बीच देश का झंडा उठा रहा है। हमारे लिए यह गर्व की बात है। टेकचंद पूरी तरह से शाकाहारी है, इसलिए मैंने अपने हाथों से बने गाय के देसी घी लड़्डू, काजू, बादाम सहित अन्य सामान खाने के लिए भेजा है। भाई दुलीचंद ने बताया कि ड्यूटी होने के कारण टीवी पर नहीं देख पाया। इस बात का थोड़ा अफसोस है। मेरी कल रात को टेकचंद से बात हुई थी। उसने बताया साथी खिलाड़ी काफी अच्छे हैं। सभी पूरी सहयोग कर रहें हैं। बातचीत दौरान उसने बताया था कि 3 सितंबर को होने वाला मैच स्थगित कर दिया गया है। यह मैच अगस्त के इस आखिरी सप्ताह में होने की उम्मीद है। अभी नया शेड्यूल जारी नहीं हुआ है।
टेकचंद एफ-54 वर्ग के ज्वैलिन थ्रो (भाला फेंक) स्पर्धा में लेंगे हिस्सा
24 अगस्त से पांच सितंबर तक जापान की राजधानी टोक्यो में हो रहे पैरालंपिक खेलों में देशभर के कुल 54 पैरा खिलाड़ियों में से 19 हरियाणा के हैं। इनमें रेवाड़ी के बावल निवासी टेकचंद एफ-54 वर्ग के भाला फेंक (जैवलिन थ्रो) स्पर्धा में हिस्सा लेंगे। टेकचंद ज्वैलिन थ्रो में आज भी विश्व में छठे स्थान पर हैं। वह ज्वैलिन थ्रो के साथ डिस्कस और शाटपुट फेंकने में भी माहिर हैं। इसी वर्ष 29 मार्च को बेंगलुरु में आयोजित 19वीं राष्ट्रीय पेरा एथलेटिक प्रतियोगिता में उन्होंने तीनों स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। तीन जुलाई को दिल्ली में आयोजित ट्रायल में टेकचंद ने 29.66 मीटर दूर भाला फेंककर टोक्यो का टिकट पक्का किया था। विश्व में छठे स्थान पर हैं टेकचंद 36 वर्षीय टेकचंद वर्ष 2018 में जकार्ता में आयोजित एशियन गेम्स के कांस्य पदक विजेता रहे हैं। वर्ष 2019 में दुबई में आयोजित विश्व चैंपियनशिप में छठी रैंक हासिल की थी। खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग में प्रशिक्षक के पद पर कार्यरत टेकचंद का कहना है कि टोक्यो की राह को आसान बनाने में उनके प्रारंभिक प्रशिक्षक भीम अवॉर्डी सतबीर सिंह, वर्तमान प्रशिक्षक नजफगढ़ निवासी अरुण कुमार व सहायक के रूप में प्रदीप कुमार का अहम योगदान रहा है।
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