रेवाड़ी। जिले में कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए शिक्षा विभाग ने स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों को चिह्नित कर उन्हें स्कूल से जोड़ने के उद्देश्य से विशेष अभियान शुरू किया है। इसके तहत जिला स्तर पर सर्वे कर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा रहा है। आयु और शैक्षणिक स्तर के अनुसार संबंधित बच्चों को एक विशेष ब्रिज कोर्स कराया जाएगा।
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए उपायुक्त कार्यालय की निगरानी में संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। एडीसी राहुल मोदी ने बताया कि जिले में नौ जनवरी तक आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान के लिए विशेष सर्वे अभियान चलाया जा रहा है।
इसका उद्देश्य उन बच्चों तक पहुंचना है, जो किसी कारणवश स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। उन्होंने आमजन से भी इस मुहिम में सहयोग की अपील करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति को 6 वर्ष से अधिक और 19 वर्ष से कम आयु का ऐसा बच्चा दिखाई देता है, जो स्कूल नहीं जा रहा है, तो उसकी जानकारी जिला प्रशासन को दी जा सकती है।
एडीसी ने बताया कि इसके लिए जिला स्तर पर दो हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। नागरिक समग्र शिक्षा अभियान के एपीसी कृष्ण और उप अधीक्षक प्रदीप कुमार के मोबाइल नंबर 9416417326 तथा 8901922300 पर सूचना देकर ऐसे बच्चों के बारे में जानकारी साझा कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि आमतौर पर ऐसे बच्चे ईंट-भट्ठों, झुग्गी-झोपड़ियों, रेलवे स्टेशनों या गांवों में मिल जाते हैं, जो किसी कारण से शिक्षा से दूर रह गए हैं।
उन्होंने बताया कि सर्वे के दौरान यदि 6 से 14 वर्ष की आयु का कोई बच्चा शिक्षा विभाग के संपर्क में आता है, तो उसकी आयु और शैक्षणिक स्तर के अनुसार पहले एक विशेष ब्रिज कोर्स कराया जाएगा।
इसके बाद बच्चे को उसकी आयु के अनुरूप कक्षा में दाखिला दिलवाया जाएगा, ताकि वह नियमित शिक्षा से जुड़ सके। इसके साथ ही बच्चों की पढ़ाई में आने वाली सामाजिक व आर्थिक बाधाओं को भी दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
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किशोरों को शिक्षित बनाने के लिए छह माह की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी
एडीसी राहुल मोदी ने बताया कि यदि स्कूल नहीं जा रहा कोई किशोर 16 से 19 वर्ष की आयु वर्ग में आता है, तो उसके लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। ऐसे किशोरों को शिक्षित बनाने के लिए छह माह की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके उपरांत उन्हें हरियाणा ओपन स्कूल से दसवीं कक्षा की परीक्षा दिलवाई जाएगी। इसके लिए प्रत्येक छात्र को दो हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाएगी। परीक्षा तक ऐसे किशोरों को नजदीकी सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए भेजा जाएगा, ताकि उनकी शैक्षणिक निरंतरता बनी रहे।