फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नागरिक अस्पताल में जरूरी दवाओं का टोटा, मरीज परेशान

विज्ञापन
नागरिक अस्पताल में दवाइयां लेने के लिए लाइन में खड़े मरीज और तीमारदार। - फोटो : Rewari
विज्ञापन
रेवाड़ी। शहर के नागरिक अस्पताल में सरकार की निशुल्क दवा योजना मरीजों के लिए घोषणा के मुताबिक खरी साबित नहीं हो रही। दूर-दूर से आने वाले मरीजों को पांच में से 2-3 दवाएं अब भी बाहर की लिखी जा रही हैं। इससे मरीजों को उपचार के लिए बाहर से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। अमर उजाला टीम ने सोमवार को जब नागरिक अस्पताल में निशुल्क दवा योजना का जांच की की तो सच्चाई सामने आई। इस दौरान मरीजों ने टीम को बताया कि उन्हें किसी बीमारी की 5 दवाएं लिखी जाती हैं तो उनमें से बुखार की पैरासीटामॉल व मलेरिया की क्लोरोक्विन जैसी एक दो सस्ती दवाएं तो अस्पताल से मिल जाती हैं। इसके अलावा 2-3 दवाएं जो बाहर से लेने के लिए लिखी जाती हैं। वे अधिकतर महंगी होती हैं। बाहर से लिखी जाने वाली दवाओं की अस्पताल में अनुप्लब्धता है, लेकिन रोग से छुटकारा पाने के लिए उनका लिया जाना जरूरी होने की सलाह दी जाती है। अस्पताल में लगी मरीजों की कतार से चिकित्सकों को दिखाकर लौटे अधिकतर मरीजों का यही कहना था।
विज्ञापन

------------
सरकार की ओर से मिलता है बजट
गरीबों को अच्छा इलाज और मुफ्त दवाइयां देने के लिए हर साल प्रदेश सरकार लाखों रुपये का बजट देती है। साल के शुरूआती माह में दवाइयों का स्टॉक अस्पताल में नजर आता है, लेकिन मात्र 2 माह बाद ही ऐसी स्थिति हो जाती है जैसे वर्षों से दवाइयों का स्टॉक ही नहीं आया हो। अगर स्टाफ में दवाई उपलब्ध भी होती है तो चिकित्सक उस दवाइयों को लिखने की बजाय ऐसी दवाई लिखते हैं, जो किसी भी कीमत पर अस्पताल में नहीं मिल सकती और मरीज को मजबूर होकर अपनी जेब ढीली बाहर बने मेडिकल स्टोर पर करवानी पड़ती है।
--------------
सीएम विंडो तक की गईं शिकायतें, लेकिन नहीं हुई कार्रवाई
प्रदेश सरकार की ओर से ही गरीबों को मुफ्त दवाई और इलाज की सुविधा के साथ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इसे प्रभावी ढंग से सुचारु रखने के लिए सख्त आदेश दिए गए हैं, लेकिन अस्पताल प्रशासन कोई इस संबंध में कोई कार्य नहीं हो रहा है। कुछ माह पहले इस तरह की शिकायतें सीएम विंडो से लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के पास पहुंची, लेकिन आज तक कार्रवाई नहीं हो सकी है।
विज्ञापन

------------
बेहतर इलाज के बहाने घर बुलाने का भी आरोप:
सिविल अस्पताल में चिकित्सक सरकारी स्लीप पर महंगी दवाई लिखकर न केवल अपने पसंदीदा केमिस्टों को लाभ पहुंचा रहे हैं, बल्कि सरकारी आदेशों को पलीता भी लगा रहे हैं। चिकित्सकों की मनमानी का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अस्पताल के चिकित्सकों पर बेहतर उपचार के लिए मरीजों को अपने घर या क्लिनिक बुलाने का आरोप लग चुका है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग ऐसे चिकित्सकों पर नकेल कसने में गंभीरता नहीं दिखाने पर चिकित्सकों ने अब सरकारी स्लिपों पर साल्ट के बजाय महंगी दवाई लिखने में भी कोई संकोच नहीं कर रहे हैं।
------------
बाहर से दवाई लेने की दी सलाह
बेटी को बुखार था। अस्पताल लेकर आई थी। यहां डॉक्टर को दिखाने के बाद दवाइयां लीं। यहां से चार में से सिर्फ एक ही दवा मिली और बाकी बाहर से लेने की सलाह दी गई। छह महीने पहले भी यहां पर आई थी तब भी यही हालात थे। बाहर से दवा लेनी पड़ी थी।
- गीता देवी, बासदूदा तीमारदार
-----
चार में से मिलीं दो दवाइयां
मैं चर्म रोग के डॉक्टर को दिखाने आया हूं। डॉक्टर ने चार दवाइयां लिखीं हैं, जिसमें से दो ही दवाइयां मिली हैं। मेरे पिताजी का भी यहां पर इलाज चल रहा है, उनकी दवाइयां भी बाहर से लेनी पड़ रही हैं। इतनी दूर से किराया लगाकर आते हैं, इससे अच्छा तो प्राइवेट में दिखाते तो नंबर भी जल्दी आता है और दवाइयां भी वहीं मिल जाती है।
- रोहित कुमार, काकोड़िया
--------
व्यवस्था में कोई सुधार नहीं
बच्चे को जुकाम व खांसी की दवा दिलाने आई हूं। डॉक्टर ने तीन दवा लिखी, जिनमें से दो दवा यहां मिली, जबकि एक दवाई को बाहर से लेने की सलाह दी हैं। पहले भी यहां पर कई बार आ चुकी हूं, लेकिन व्यवस्था में कोई सुधार नहीं है। पूरी दवाइयां नहीं मिलती कोई न कोई दवाई बाहर से लेनी जरूर पड़ती है।
- अनिता, डवाना
----------
चर्म रोग के डॉक्टर को दिखाने के लिए आया था। डॉक्टर ने पांच दवाइयां लिखी, जिनमें से तीन तो यहां मिल गई, लेकिन बाहर से दो दवाइयां लेनी पड़ी। अस्पताल में जरूरी दवाइयों का टोटा है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग को मरीजों को सारी दवाइयां उपलब्ध करानी चाहिए।
- नीरज, सेक्टर तीन
-----------
अस्पताल में इंजेक्शन व जरूरी दवाइयों का स्टॉक खत्म
शहर के नागरिक अस्पताल में एंटीबायोटिक और एलर्जी के पांच इंजेक्शन नहीं है। यहीं नहीं अस्पताल में विटामिन-सी, दर्द, बुखार, चक्कर, एंटीबायोटिक गोली, थाइराइड, बीपी व खांसी की सिरप नहीं है। यह सभी दवाइयों की कीमत 40 रुपये से 200 रुपये तक है, जो कि नागरिक अस्पताल में डॉक्टर मरीजों को महंगी दवाई लिखते हैं।
------------------
अधिकारी का वर्जन:
मेरे संज्ञान में यह मामला आपके माध्यम से आया है। फार्मेसी ऑफिसर को बुलाकर उन्हें हिदायत दी है कि मरीजों को अस्पताल में पूरी दवाइयां मिले। अगर यहां के डॉक्टर बाहर की दवाइयां लिख रहे हैं तो यह गलत है। ओपीडी पर्ची की जांच कराई जाएगी। अगर अस्पताल में दवाई का स्टॉक खत्म हो रहा है तो स्थानीय स्तर पर दवाइयों की खरीदारी करके मरीजों को उपलब्ध कराई जाएगी। डॉक्टर अस्पताल से बाहर की कोई भी दवा नहीं लिखें। यदि कोई लिखेगा तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
विज्ञापन

- डॉ. जयभगवान, पीएमओ, नागरिक अस्पताल, रेवाड़ी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें