रेवाड़ी। परिवहन विभाग की ओर से किए जाने वाले तमाम दावों के बावजूद जिले में 9 मुख्य सड़क मार्गों पर बीते 17 महीने से रोडवेज बसों के पहिया रुका हुआ है। इन मार्गों पर बसों के संचालन कराने की मांग विद्यार्थी संगठनों से लेकर कई सामाजिक संगठन भी कर चुके हैं। बावजूद इसके आज तक बसों का संचालन शुरू नहीं हो पाया।
बता दें कि इन मार्गों से प्रत्येक दिन लगभग पांच हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं। इनमें विद्यार्थी भी शामिल हैं। इतना ही नहीं रेवाड़ी-नारनौल व रेवाड़ी-महेंद्रगढ़ मार्ग पर भी अभी बसों का संचालन पूरी तरह शुरू नहीं हो सका है। रेवाड़ी-महेंद्रगढ़ रोड पर 19 बसों के मुकाबले महज 10 रोडवेज बसें ही चल रही हैं।
कोरोना की दूसरी लहर के बाद सभी शिक्षण संस्थान खुल चुके हैं, लेकिन अभी भी परिवहन विभाग नींद से नहीं जागा है। अभी भी परिवहन विभाग ने कई रूटों पर बसों का संचालन शुरू नहीं किया है। वहीं कई रूटों पर रोडवेज की जगह पर परमिट बसों को समय दे दिया गया है। बसों की कमी के चलते विद्यार्थियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
जिले के अधिकतर गांवों के विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने के लिए शहर आते हैं। कोरोना के चलते विभाग शिक्षण संस्थान बंद होने के बाद विभाग की ओर से कई मार्गों पर बसों का संचालन बंद कर दिया था। अब सभी शिक्षण संस्थान खुल चुके हैं, लेकिन परिवहन विभाग ने अभी कई रूटों पर बसों का संचालन शुरू नहीं किया है। बसों की कमी के चलते शहर के कॉलेेेजों में शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों को प्राइवेट वाहनों में जोखिम लेकर सफर करना पड़ रहा है। वहीं परमिट बस संचालक पास धारक छात्राओं को बसों में बैठाने में आनाकानी करते हैं। वहीं कई परमिट बस परिचालकों छात्राओं के साथ बदसलूकी करते देखा गया है।
इन रूटों पर नहीं चलतीं एक भी रोडवेज बसें:
जिले के कई गांव ऐसे हैं जहां से प्रतिदिन सैकड़ों लोग शहर आते हैं। लेकिन फिर विभाग द्वारा इन रूटों पर बसों का संचालन शुरू नहीं किया गया है। जिले के गांव कतोपुरी, काकर कुतीना, चिताडुंगरा, अलावलपुर, आईजीयू स्पेशल बस, जाट-जाटी, बहाला, बरेली सहित अन्य रूटों पर कोरोना संकट से पहले रोडवेज बसों को संचालन किया जाता था। कोरोना की पहली लहर के बाद विभाग की ओर से जरूरत के हिसाब से बसों का संचालन शुरू किया था। कोरोनाकाल से पहले इन रूटों पर 3-4 बसों का संचालन होता था।
इन मार्गों पर है रोडवेज बसों की कमी:
जिले में कई रूट ऐेसे हैं, जिन पर केवल नाममात्र की रोडवेज बसें चलती हैं। वहीं कोरोना महामारी के बाद लगभग अधिकांश रोडवेज बसों की जगह परमिट बसों का समय दे दिया गया है। विभाग द्वारा महेेंद्रगढ़, नारनौल, पटौदी व धारूहेड़ा सहित अन्य कई मार्गों पर बसों की संख्या में कमी कर दी गई है। इनकी जगह परमिट बसों को समय दे दिया गया है। विभाग द्वारा जो परमिट बसों को समय दिया गया है। वह समय या तो स्कूल व कॉलेज में आने- जाने का समय है। परमिट बस संचालक स्कूल व कॉलेज के विद्यार्थियों को देखकर गांव के स्टैंड पर बसों को या तो रोकते ही नहीं, या फिर इतनी दूर रोका जाता हैं कि विद्यार्थी बस में चढ़ ही नहीं पाते। वहीं अक्सर बसों में परमिट बस परिचालकों द्वारा बसों में छात्राओं के साथ अक्सर बदसलूकी करते हुए भी देखा जाता हैं। कॉलेज छात्राएं कई बार इस बारे में विभाग को अवगत भी करा चुकी हैं, लेकिन फिर विभाग नींद से नहीं जाग रहा है।
रेवाड़ी डिपो के जीएम अशोक कौशिक ने बताया कि कोरोना के चलते जिन मार्गों पर सवारियां कम थीं। वहां पर बसों को बंद किया गया था। जैसे- जैसे सवारियां बढ़ रही हैं बसों का संचालन किया जा रहा है। इन रूटों पर भी जल्द ही बसों का संचालन शुरू कराया जाएगा।