संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिला राज्य के उन शीर्ष 10 जिलों में शामिल है, जिनकी दूध उत्पादन वृद्धि दर राज्य औसत से अधिक है। रेवाड़ी का 3.78% और राज्यरा औसत दूध उत्पादन वृद्धि दर 3.07% है। रेवाड़ी राज्य के उन 13 जिलों में शामिल है, जिनमें राज्य औसत से अधिक प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता है।
जिले में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 1136 ग्राम है, जबकि राज्य औसत 1081 ग्राम है। जिले का दूध उत्पादन 4.34 लाख टन है, जो हरियाणा राज्य के कुल 116.29 लाख टन दूध उत्पादन का 3.73% है। बकरी के दूध उत्पादन में जिला 4240 टन उत्पादन करके राज्य में 5वें स्थान पर है, जो राज्य के कुल उत्पादन का लगभग 8% है।
जिले में वार्षिक अनुमानित औसत दैनिक दूध उत्पादन विदेशी गायों में 11.37 किलोग्राम, संकर गायों में 9.97 किलोग्राम, देशी गायों में 6.86 किलोग्राम, अप्रजाति गायों में 5.92 किलोग्राम, देशी भैंसों में 10.54 किलोग्राम जबकि अप्रजाति भैंसों में 8.83 किलोग्राम बताया गया है।
रेवाड़ी देश की राजधानी के साथ ही गुरूग्राम जैसे शहर से सटा है। दिल्ली और गुरुग्राम में हरियाणा की देसी नस्ल की गाय व भैंस के दूध की मांग भी है।
डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत नाबार्ड द्वारा भैंस व गायों की खरीद पर सामान्य वर्ग के पशु पालक को 25 फीसदी तथा अनुसूचित जाति वर्ग के पशुपालकों को 33.33 प्रतिशत तक अनुदान देने का प्रावधान है।
इन यूनिटों के माध्यम से पशुपालकों को दूध बिक्री के से आमदनी भी हो रही है। वर्तमान में बावल में 14, कोसली में 5 ओर रेवाड़ी में 25 यूनिट स्थापित की गई है। संवाद
-
एकीकृत पशुधन बीमा योजना के तहत 32, 633 पशुओं का किया बीमा
दूध उत्पादन के मामले में जिले को अग्रणी बनाने के लिए उठाए गए कदम के सकारात्मक परिणाम आने लगे हैं। डेयरी उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए जिले के पशुपालकों न केवल रुचि लेते हुए मिनी डेयरी स्थापित की, बल्कि रेवाड़ी को दूध उत्पादन के मामले में प्रदेश में आगे ले जाने की दिशा में नई पहल की। एकीकृत पशुधन बीमा योजना के तहत जिलाभर में 32 हजार 633 पशुओं का बीमा किया गया है, ताकि पशुधन को जोखिम फ्री किया जा सके। इनमें अनुसूचित जाति वर्ग के पशुपालकों के 3027 पशु भी शामिल हैं। डेयरी उद्यमिता के तहत कोई भी बेरोजगार युवक या पशुपालन व्यवसाय शुरू करने वाले नागरिक इस योजना का फायदा ले सकता है।
नई नस्लों की जानकारी के लिए होती है स्पर्धा
पशुपालकों को पशुधन के मामले में जागरूक करने के लिए पशुपालन एवं डेयरिंग विभाग की ओर से राज्य स्तरीय पशु मेला एवं प्रदर्शनियों का आयोजन कराया जाता है, ताकि नई नस्लों की जानकारी से पशुपालक जागरूक हो सकें। जिले में बावल में 11, कोसली व रेवाड़ी क्षेत्र में 38 दुग्ध प्रतियोगिताएं कराई गई हैं, उच्च नस्ल के पशुओं की पहचान की जा सके। इनमें पशुपालकों को इनाम राशि देकर सम्मानित करने की पहल भी है।
वर्जन
पशुधन को बढ़ावा देने के लिए नाबार्ड के अलावा केंद्रीय सहकारिता बैंक, पशुपालन विभाग व अन्य संबंधित विभागों के माध्यम से योजनाएं चलाई गई हैं। इनकी जानकारी के लिए अंत्योदय सरल केंद्र स्थापित किए गए हैं। पशुपालकों को लाभकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है।-नसीब सिंह, निदेशक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग।