कृषि विज्ञान केंद्र बावल में कपास की उन्नत खेती व गुलाबी सुंडी के प्रबंधन पर आयोजित प्रशिक्षण शि
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बावल। बावल कृषि विज्ञान केंद्र में कपास की उन्नत खेती व गुलाबी सुंडी के प्रबंधन पर कृषि विभाग की ओर से एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र बावल के निदेशक डॉ. धर्मबीर यादव ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि किसान मिट्टी की जांच अवश्य कराएं। मिट्टी की जांच के आधार पर पोषक तत्वों की मात्रा तय की जानी चाहिए। बीटी कपास में जहां खुला पानी लगता है, वहां पहला पानी बिजाई के 45 से 50 दिन बाद ही लगाएं। यहां पर बायो फर्टिलाइजर लैब है व मिट्टी पानी की जांच की प्रयोगशाला भी है।
कृषि विज्ञान केंद्र के कीट वैज्ञानिक डॉ. बलबीर सिंह ने कपास में लगने वाले मुख्य कीटों के लक्षण व उनके प्रबंधन के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने गुलाबी सुंडी के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि कपास की लकड़ी व बिनौला का भंडारण सावधानीपूर्वक करना चाहिए। गुलाबी सुंडी की पतंगों को रोकने के लिए अप्रैल से खेतों में भंडारित लकड़ियों को पालिथीन सीट या मच्छरदानी से ढकें। किसान हरी बाल व रोसेट फूल को पहचान कर विज्ञानियों से सलाह लें।
इस दौरान डॉ. नरेश यादव ने कपास की बीमारियों के बारे में व प्रबंधन के बारे में बताया। पादप रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कुमार ने कपास में बीज उपचार व बीमारियों की जानकारी दी। डॉ. सत्यजीत ने बीटी कपास में खाद की उचित मात्रा व सिचाई की विज्ञानी विधि के बारे में बताया। इस मौके पर खंड कृषि अधिकारी बावल डॉ. सतीश यादव, खंड कृषि अधिकारी जाटूसना डॉ. संजू यादव, खंड कृषि अधिकारी रेवाड़ी डॉ. मनोज, एडीओ संघ के प्रधान डॉ. संजय यादव, एडीओ डॉ. रवि, डॉ. सतीश, डॉ. रामपाल आदि मौजूद रहे।