रेवाड़ी। तापमान में बढ़ोतरी के साथ ही बिजली की अघोषित कटौती लोगों के लिए नासूर बनती जा रही है। ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के साथ अब औद्योगिक क्षेत्र भी बिजली कटौती हो रही है। मंगलवार से औद्योगिक क्षेत्र में भी अघोषित कटौती शुरू हो गई है। इससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
बढ़ती गर्मी के चलते जिला में हर रोज 65 लाख यूनिट की खपत दर्ज की जा रही है, जबकि आगे से महज 54 लाख यूनिट ही आ रही है। डिमांड बढ़ती जा रही है लेकिन ऊपर से मिल रही बिजली और भी कटौती करके मिल रही है। तीन दिन पहले तक जिला को 56 लाख यूनिट मिल रही थी, वहीं अब 54 लाख यूनिट ही दी जा रही है। पिछले साल मई-जून में बिजली खपत 80 लाख यूनिट प्रतिदिन पर पहुंच गई थी, हालात इस बार भी वैसे ही होने जा रहे हैं।
शहर के झज्जर रोड व कृष्ण नगर स्थित 220 केवी के दोनों पावर हाउस को धनौंदा ग्रिड से बिजली आपूर्ति हो रही है। वहीं बावल क्षेत्र स्थित 220केवी सब स्टेशन को भिवाड़ी से बिजली आपूर्ति हो रही है। दोनों ही स्थानों से कम मात्रा में बिजली बिल मिलने के कारण शहरी क्षेत्र में जहां दिनभर में तीन घंटे तक कटौती की जा रही हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्र में भी चार घंटे तक बत्ती गुल हो रही है। इसके अलावा कृषि फीडरों को मिलने वाली बिजली में भी पांच घंटे तक के कटौती की जा रही है।
विशेष अभियान चलाकर किया जा रहा मरम्मत कार्य
बिजली खपत बढ़ने के साथ ही ट्रांसफार्मरों में ओवरलोडिंग व कंडक्टर खराब होने की समस्या बढ़ गई है। निगम की ओर से इस स्थिति से निपटने के लिए विशेष अभियान चलाकर उपकेंद्रों व फीडरों पर मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। इसके तहत पुराने फ्यूज, कंडक्टर को बदला जा रहा है, जो अप्रैल के अंत तक चलेगा।
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कोट
बावल औद्योगिक क्षेत्र में बिजली की कोई कटौती नहीं है। सोमवार रात को 15 मिनट की कटौती की गई थी, जिसे दोबारा से चालू कर दिया गया था।
- बृजमोहन शर्मा, एसडीओ, बावल
कंपनी को हो रहा आर्थिक नुकसान
-दिन में लगभग 4 से 5 बार बिजली कटौती होती है। रोजाना 2 से 3 घंटे बिजली गुल हो जाती है। इससे उत्पाद और उत्पादन प्रभावित होता है। इससे प्रत्येक कंपनी को आर्थिक नुकसान हो रहा है। - एसएन शर्मा, अध्यक्ष, आरसीसीआई।
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- बावल क्षेत्र में बिजली कटौती बड़ी समस्या है। बिजली निगम के अधिकारियों के साथ कंपनी प्रबंधन की बैठक भी हुई थी, मगर परिणाम सार्थक नहीं आए। निगम ने बैकअप बढ़ाने की बात कही थी, लेकिन यह काम भी नहीं हुआ। कंपनियां लगातार नुकसान उठा रही हैं।
- अनुराधा यादव, महासचिव, आरसीसीआई।