रेवाड़ी। बच्चों के माता-पिता व अभिभावक बच्चों को उनकी रुचि के अनुसार पढ़ाई करने दें। अभिभावक बच्चों पर आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर, जज या इंजीनियर बनने के लिए दबाव न बनाए क्योंकि दबाव के कारण बच्चे पर तनाव बढ़ता है और बच्चा अपनी रुचि के अनुसार आगे नहीं बढ़ पाता और अपने लक्ष्य से भटक जाता है। उक्त बातें डीसी अशोक कुमार गर्ग ने कहीं हैं। वह मंगलवार को बाल भवन ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में अभिभावकों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का मकसद केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं होना चाहिए। एसआरआई संस्था ने सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को स्कूल समय के उपरांत नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा पास उत्तीर्ण करने के लिए बच्चों को शिक्षित करने का जो बीड़ा उठाया, जिसके परिणाम स्वरूप रेवाड़ी के 10 बच्चों को जवाहर नवोदय विद्यालय में प्रवेश प्राप्त करने में सफलता हासिल हुई। इसके लिए संस्था व बच्चे बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि संस्था बच्चों का भविष्य संवार कर उन्हें काबिल बना रही है जो कि एक सराहनीय पहल है। इस अवसर पर उन्होंने चयनित विद्यार्थियों को पुरस्कृत भी किया।
डीसी ने कहा कि सरकार का पूरा फोकस बच्चों की प्रतिभा और रुचि के हिसाब से उन्हें स्किल्ड बनाने पर है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को चाहिए कि वे केवल डिग्री धारक युवा तैयार न करें, बल्कि हमारे युवा स्किल्ड, कान्फिडेंट, प्रैक्टिकल और कैलकुलेटिव होना चाहिए, जिससे उनका सर्वांगीण विकास हो सके। सरकार इसके लिए जमीन तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि कोई बच्चा शिक्षा के ज्ञान से वंचित न रहे, इसके लिए डिजिटल सशक्तीकरण पर बल दिया जा रहा है। उन्होंने ‘डिजिटल सशक्तीकरण और ऑनलाइन शिक्षा’ पर प्रकाश डालते हुए इसे प्रत्येक विद्यार्थी तक कम खर्च में शिक्षा का ज्ञान पहुंचाने का सशक्त माध्यम बताया।
इस अवसर पर एआईपीआरओ सुरेश कुमार गुप्ता, विनय, सुरेंद्र, आकाश, पूनम, पूजा, संदीप, सुधीर, आशीष व योगेश सहित बच्चों के माता-पिता व अभिभावक उपस्थित रहे।