कोसली। मानसून में देरी से बाजरे की बिजाई कर चूके किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया है। जिले की बजाय अकेले कोसली क्षेत्र की बात करें तो यहां पर मध्य जून के दौरान हुई बारिश के दौरान आठ हजार एकड़ में किसानों ने बाजरे की बिजाई की थी। बाजरे का फटाव भी अच्छा हुआ, लेकिन अब जुलाई के 11 दिन बीत जाने के बाद भी बारिश नहीं होने से फसल सूख रही है।
बता दें कि रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ व भिवानी सहित दक्षिण हरियाणा में पानी की कमी के चलते बाजरे व सरसों की फसल पूरी तरह से बारिश पर निर्भर करती है। लेकिन इस बार मानसून में देरी के चलते किसानों की चिंता बढ़ गई है। बता दें कि बाजरा बुवाई के लिए एक एकड़ में औसतन चार हजार रुपये का खर्च आता है। ज्यादातर किसान सहकारी समिति व बाजारों से उधार में बीज व खाद लेते हैं, ताकि फसल कटाई के समय जरूरी कामों को निपटाने के साथ उधार निपटाया जा सके। लेकिन मौसम की मार से किसानों के चेहरों पर चिंता बढ़ी हुई है। यदि अगले एक-दो दिन में बारिश नहीं हुई तो आर्थिक बदहाली का सामना करना पड़ सकता है।
41 हजार किसानों ने कराया था पंजीकरण
जिले में बाजरा किसानों की मुख्य फसल माना जाता है। वर्ष 2020 की बात करें तो जिले के 41 हजार किसानों ने बाजरा उत्पाद बेचने के लिए मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण कराया हुआ था। दक्षिण हरियाणा के किसानों को निर्धारित नहरी पानी नहीं मिलने के चलते यह फसल पूरी तरह से बारिश पर निर्भर करती है। पशुओं की चारा की बात करें या फिर बाजरा उपज की, अब पहले के मुकाबले कीमत बेहतर मिल रही है। बीते साल अकेले कोसली क्षेत्र में पहली बार रिकॉर्ड 7.5 लाख क्विंटल बाजरे की खरीद सरकार की ओर से की गई थी। पहले किसानों को 1200 रुपये प्रति क्विंटल में बाजरा बेचना पड़ता था, लेकिन दो सालों से 2100 से ज्यादा में बाजरा की खरीद सरकार की ओर से की जा रही है। इस बार बाजरा की सरकारी खरीद 2250 रुपये निर्धारित की गई है। अच्छी कीमत मिलने के चलते ही किसानों इस बार पहले के मुकाबले ज्यादा बिजाई की है।