रेवाड़ी। जिले में डेंगू के मामलों में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है। शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में तीन नए मामले सामने आए हैं। इन नए मामलों के साथ जिले में अब तक कुल 115 लोग डेंगू से संक्रमित पाए जा चुके हैं।
अगस्त माह समापन की ओर चल रहा है और जिले में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। नगर परिषद की ओर से प्रत्येक वार्ड में फॉगिंग कार्य कराने का कार्य शुरू किया गया था लेकिन अब डेंगू केस मिलने वाले स्थानों पर ही फॉगिंग की जा रही है।
नगर परिषद की सुस्ती के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ने के साथ डेंगू के केस लगातार बढ़ रहे हैं। बारिश से हुए जलभराव के बाद मच्छरों की संख्या भी ज्यादा हो गई है। स्वास्थ्य विभाग की डेंगूू की रोकथाम के लिए लगातार प्रयास करने में लगा हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से डेंगू केस मिलने पर मरीजों को मच्छरों से बचाव के लिए कीटनाशक मच्छरदानी भी दी जा रही है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि हालात नियंत्रण में हैं और सभी मरीजों का उपचार जारी है।
वहीं नए तीन मरीजों में से दो को अस्पताल में भर्ती कराया गया है जिनका उपचार चल रहा है। बाकी मरीज को हल्के लक्षण मिलने के बाद घर भेज दिया गया।
सबसे ज्यादा केस शहर में
डेंगू के मामलों में अभी तक शहर में 39, सीएचसी गुरावड़ा में 6, सीएचसी मीरपुर में 7, सीएचसी बावल में 27, सीएचसी खोल में 30 व नाहड़ सीएचसी के अंतर्गत 6 डेंगू पॉजिटिव मरीज मिल चुके है। स्वास्थ्य विभाग की टीम के जांच के दौरान मच्छर का लार्वा मिलने पर अभी तक 1916 लोगों को नोटिस थमा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग की ब्रीडिंग चेकर टीम अब तक सोर्स रिडेक्शन एक्टिविटी के तहत 17 लाख 44 हजार 559 घरों में लार्वा की जांच कर चुकी है। अब तक 2077 डेंगू संभावित लोगों के ब्लड सैंपल लिए जा चुके हैं।
डेंगू के लक्षण
विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू के मामलों में बारिश का मौसम सबसे संवेदनशील समय होता है। हल्का बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, आंखों के पीछे दर्द और लाल चकत्ते डेंगू के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में मरीजों को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच करवाने की सलाह दी जाती है।
वर्जन:
जिलेवासियों से अपील की है कि वे लापरवाही न बरतें। यदि किसी को तेज बुखार हो रहा है या प्लेटलेट्स कम हो रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि समय पर इलाज मिलने से डेंगू को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। -डॉ. अमित यादव, नोडल अधिकारी, डेंगू एवं मलेरिया