आगामी जून माह में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) देने के लिए अब दिल्ली, गुरुग्राम या दूर-दराज के जिलों में जाने की परेशानी नहीं होगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के माध्यम से होने वाली विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की पात्रता परीक्षा नेट अब रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिले में भी होंगी। पात्रता परीक्षा के लिए आवेदन करने के दौरान मांगे जा रहे विकल्प में रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, भिवानी और झज्जर जिले शामिल हैं। इससे पहले परीक्षा केंद्र के विकल्प भरते वक्त रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, भिवानी, झज्जर जिले नहीं आते थे। इस बार यह सुविधा दी गई है। अभ्यर्थी आवेदन कर रहे हैं तो अपने गृह जिला और समीपवर्ती जिलों में विकल्प के रूप में भर रहे हैं।
अभ्यर्थियों को आवेदन के बाद जब एडमिट कार्ड जारी होंगे उसमें जिले के शिक्षण संस्थान का नाम आएंगे। पहली बार रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिलों में नेट परीक्षा के लिए सेंटर बनाए जाने से आवेदन करने वालों में उत्साह है। जिले के हजारों अभ्यर्थी पात्रता परीक्षा देते हैं। इससे पहले रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिले के परीक्षार्थियों को 100 से 200 किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। ऐसे में काफी संख्या में अभ्यर्थी आवेदन करने के बावजूद परीक्षा देने नहीं जाते थे। जिले में परीक्षा केंद्र नजदीक बनाए जाने से आवेदन करने वालों की संख्या में इजाफा होने की उम्मीद है। परीक्षा केंद्र दूर होने के कारण दिव्यांग और महिला अभ्यर्थियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। इस बार यूजीसी ने नजदीक सेंटर बनाकर नई पहल की है।
20 मई तक आनलाइन आवेदन
अभ्यर्थियों को 20 मई तक आवेदन करना होगा। इसके बाद आवेदन फार्म में रही त्रुटियों को 21 से 23 मई के बीच सुधार कर सकते हैं। योग सहित कुल 82 विभिन्न विषयों में पात्रता की परीक्षा होती है। इस बार दिसंबर 2021 और जून 2022 की परीक्षा को एक में मर्ज कर जून के मध्य में आयोजित किया जा रहा है।
इस क्षेत्र के विद्यार्थियों ने यूजीसी को दूर-दराज के जिलों और राज्यों में परीक्षा केंद्र बनाने के कारण आ रही समस्याओं को अवगत कराया था। दो परीक्षाएं एक साथ होने से और हर साल विद्यार्थियों की संख्या बढ़ते रहने से परीक्षा ऑनलाइन मोड से करवाने में अनेक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इस बार नजदीक परीक्षा केंद्र बनाकर विद्यार्थियों के लिए राहत प्रदान की गई है। इससे निश्चित रूप से विद्यार्थियों को आर्थिक और मानसिक रूप से राहत मिलेगी।
-डॉ. धर्मवीर, आचार्य, योग विभाग, इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर।