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Rewari News: दस राजकीय महाविद्यालयों में स्थायी प्राचार्य नहीं

Wed, 05 Mar 2025 12:05 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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संवाद न्यूज एजेंसी
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रेवाड़ी। जिले में स्थित 11 राजकीय महाविद्यालयों में से 10 राजकीय महाविद्यालयों में स्थायी प्राचार्य नहीं हैं। इन कॉलेजों में वरिष्ठ शिक्षक प्राचार्य का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं। इससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है। साथ ही प्रशासनिक समेत विकास से संबंधित कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनइपी-2020) को लागू करने पर जोर दे रही है लेकिन 10 राजकीय महाविद्यालयों में स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिले के अधिकतर महाविद्यालय कई वर्ष से बिना प्राचार्य के चल रहे हैं। पिछले साल 19 दिसंबर को वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नत हुए प्रदेश के 33 प्राचार्यों की सूची जारी हुई थी। सूची में शामिल शिक्षक जहां कार्यरत थे वहीं कार्यभार संभाल लिया था लेकिन आज तक प्राचार्य की कुर्सी पर नहीं बैठ पाए हैं। उन्हें स्टेशन अलाॅट नहीं किया गया है।
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सेक्टर-18 स्थित प्रथम शिक्षिका माता सावित्रीबाई फुले राजकीय कन्या महाविद्यालय को छोड़कर सभी 10 महाविद्यालयों में वरिष्ठ शिक्षक प्राचार्य का अतिरिक्त प्रभार देख रहे हैं। महाविद्यालयों में जो अध्यापक अस्थायी प्राचार्य का कार्य संभाल रहे हैं वे अपना शैक्षणिक कार्य नहीं कर पा रहे हैं। महाविद्यालयों में विकास के नए कार्य भी नहीं हो पा रहे हैं और न हो कोई योजना बन पा रही है।

राजकीय महाविद्यालय खरखड़ा की प्राचार्या डाॅ. अर्चना सूटा शुक्रवार को सेवानिवृत्त हो गईं। डाॅ. सूटा के पास उच्चतर शिक्षा निदेशालय के जिला नोडल अधिकारी का भी प्रभार था। अब उनकी सेवानिवृत्ति के बाद उच्चतर शिक्षा निदेशालय के जिला नोडल अधिकारी का प्रभार उच्च विभाग द्वारा निर्देशित करना है।

पदोन्नत प्राचार्यों को स्टेशन अलाॅट होने का इंतजार
उच्चतर शिक्षा निदेशालय की ओर से पिछले साल 19 दिसंबर को प्रदेश के विभिन्न महाविद्यालयों में सेवारत 33 वरिष्ठ एसोसिएट प्रोफेसरों की प्राचार्य के पद पर पदोन्नति की सूची जारी की गई थी। आज तक इन्हें स्टेशन अलाॅट नहीं किया गया है। पदोन्नति सूची में शामिल रेवाड़ी के एक शिक्षक को अभी तक स्टेशन अलॉट नहीं हुआ। वहीं पदोन्नत हुए कई शिक्षक प्राचार्य की कुर्सी पर बैठने के पहले सेवानिवृत्त हो गए। यदि सूची जारी होने के बाद ही स्टेशन अलॉट हो गए होते तो राजकीय महाविद्यालयों में प्राचार्य तैनात हो गए होते।
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जिला नोडल अधिकारी का दायित्व मेरे पास था। मैं सेवानिवृत्त हूं। पदोन्नत एसोसिएट प्रोफेसरों को स्टेशन अलाॅट कर दिए जाते तो महाविद्यालयों को प्राचार्य मिल जाते। - डाॅ. अर्चना सूटा, जिला नोडल अधिकारी, उच्चतर शिक्षा निदेशालय।
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