रेवाड़ी। ब्रास मार्केट में दो दिन पहले एक पुस्तकालय में आग की घटना के बाद ठोस कार्रवाई नहीं की गई। वर्षों से यह बाजार कोचिंग सेंटरों का हब बना हुआ है। बहुमंजिला इमारतों में से अधिकतर में बिना किसी अनुमति और वैध प्रक्रिया के पांच से सात कोचिंग सेंटर चल रहे हैं। इन सेंटरों में अग्नि सुरक्षा के प्रबंध नहीं हैं। कई कोचिंग सेंटर ऐसे हैं कि अगर इनमें आग की घटना हो गई तो बाहर निकलने के लिए वैकल्पिक या इमरजेंसी गेट तक नहीं हैं। सभी कोचिंग सेंटर बिना फायर एनओसी के चल रहे हैं।
बीते शुक्रवार को ब्रास मार्केट में स्थित एक पुस्तकालय में आग लगी थी। फायर ब्रिगेड और आसपास के लोगों के प्रयासों से इसमें फंसे बच्चों को सुरक्षित निकाला गया था। इस घटना ने कोचिंग सेंटरों व शहर की दूसरी बिल्डिंगों में आगजनी से बचाव के प्रबंधों की पोल खोलकर रख दी है। आग से बचाव के कारगर प्रबंध नहीं होने के कारण भविष्य में बड़ा हादसा भी हो सकता है। शहर में चल रहे कोचिंग सेंटर के पास अग्निशमन विभाग की एनओसी तक नहीं है। नेशनल बिल्डिंग एक्ट का पालन नहीं किया जा रहा है।
जिन बिल्डिंगों को फायर एनओसी दी जाती है, उन्हें बिल्डिंगों की साइज और ऊंचाई के हिसाब से आग से सुरक्षा के इंतजाम करने होते हैं। अधिकांश बिल्डिंगों में सुरक्षा के नाम पर फायर एक्सटिंग्यूशर ही लगे हुए हैं। इनके समय से रिफिल कराने की कोई गारंटी नहीं होती। न ही बिल्डिंगों में रहने वाले लोगों को इमरजेंसी में इन्हें चलाने की कोई ट्रेनिंग दी जाती है। फायर बिग्रड के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार बहुमंजिला इमारतों में तो पाइप लाइन और अंडरग्राउंड वाटर टैंकों से आग बुझाने की व्यवस्था करना जरूरी होता है। ब्रास मार्केट की बिल्डिंगों में इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं की गई र्है। इमरजेंसी गेट नहीं होने के कारण घटना होने पर इन बिल्डिंगों से बच्चों को सुरक्षित आसान निकालना मुश्किल साबित हो सकता है। यही हाल शहर के दूसरे क्षेत्र में चल रहे कोचिंग सेंटरों का भी है। किसी भी कोचिंग सेंटर संचालक के पास फायर एनओसी नहीं है।
कुछ सरकारी दफ्तरों में फायर एक्सटिंग्यूशर तो लगे हैं लेकिन अधिकांश की एक्सपायर डेट खत्म हो चुका है। इन्हें समय पर रिफिल नहीं कराया जाता है। डीटीपी कार्यालय में लगे फायर एक्सटिंग्यूशर जंग खा रहे हैं।
रामभरोसे बहुमंजिला इमारतें
शहर में बड़ी संख्या में बहुमंजिली इमारतें बनी हुई हैं। इन इमारतों में भी फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। अधिकांश बिल्डिंगों को फायर ब्रिगेड की ओर से एनओसी भी मिली हुई है। एनओसी के बावजूद इन बिल्डिंगों में नेशनल बिल्डंग एक्ट की कोई पालना नहीं हो रही। एक बार लगाने के बाद अग्निशमक यंत्र धूल फांकने लगते हैं। उनकी एक्सपायरी डेट की ओर भी कोई ध्यान नहीं दिया जाता। आपातकालीन स्थिति में यह यंत्र बेकार साबित होते हैं। आगजनी की घटनाओं के समय इनसे तत्काल पर आग पर काबू पाने की उम्मीद नहीं की जा सकती।
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तीन साल पहले भी उठा था मामला
गुजरात के सूरत में तक्षशिला कांप्लेक्स की दूसरी मंजिल पर वर्ष 2019 में लगी भीषण आग में 19 छात्रों की मौत के बाद जागरूक नागरिक प्रकाश खरखड़ा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर अवगत कराया था कि रेवाड़ी और धारूहेड़ा में कई ऐसी बिल्डिंग मौजूद हैं, जहां फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। आयोग की ओर से इसे जन सुरक्षा का मामला मानते हुए पत्र को रेवाड़ी डीसी के पास भेज दिया था। डीसी की ओर से इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाए गए। इस समय ब्रास मार्केट में कई ऑफिस, होटल व प्राइवेट संस्थान चल रहे हैं। इनमें फायर सेफ्टी को लेकर कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं।
कोचिंग सेंटरों का सर्वे शुरू
शहर में बड़ी संख्या में ऐसे कोचिंग सेंटर चल रहे हैं, जिनमें आग से बचाव के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। इन कोचिंग सेंटरों का सर्वे शुरू करा दिया गया है। नियमों की पालन नहीं करने वाले कोचिंग सेंटरों और दूसरे बिल्डिंग मालिकों को नोटिस देने के बाद कार्रवाई की जाएगी।- एसके सांगवान, चीफ फायर ऑफिसर