फोटो : 1भाड़ावास ओवरब्रिज के पास जमा बारिश का पानी। संवाद
रेवाड़ी। जिले में इस वर्ष मानसून ने जोरदार दस्तक दी थी और चार महीने में अब तक 300 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो मानसून सीजन के औसतन तय कोटे का लगभग आधा है। आमतौर पर जून से सितंबर के बीच 400 से 450 एमएम बारिश को अच्छा माना गया है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि, मानसून की चाल में उतार-चढ़ाव आना मौसम की सामान्य विशेषता है। करीब चार महीने तक चलने वाले इस मानसून सीजन में कभी जोरदार बारिश तो कभी सुस्ती का दौर चलता है।
इस बार शुरूआत अच्छी रही, मगर जुलाई माह में ज्यादा बारिश नहीं हुई है, अधिकतर बूंदाबांदी ही देखने को मिली है। जुलाई का पहला सप्ताह तो अच्छा बीता था। मगर उसके बाद कभी कभी ही बारिश देखने को मिली है। आने वाले दिनों में भी बादलों के सक्रिय रहने के संकेत है। विभाग के अनुसार अगस्त में अच्छी बारिश की संभावना जताई गई है।
खेतों में इस समय खरीफ में बाजरा व कपास की फसलों की स्थिति बेहतर है। हालांकि, मानसून की इस रफ्तार के बीच कुछ जगहों पर फसलों को नुकसान भी झेलना पड़ा है। जिले के कुछ क्षेत्रों में तेज बारिश और जलभराव के चलते गेंदे की फसल को खासा नुकसान हुआ है। लगभग 50 एकड़ में गेंदे के पौधे नष्ट हो गए हैं। इससे फूल उत्पादकों को नुकसान का सामना करना पड़ा है, क्योंकि गेंदे के फूलों की मांग धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में बनी रहती है।