खाड़ी देशों में जारी तनाव के कारण औद्योगिक क्षेत्र भिवाड़ी में एलपीजी और पीएनजी गैस की भारी कमी ने उद्योगों की रफ्तार थाम दी है। खासकर खुशखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया में हालात गंभीर हो गए हैं जहां गैस सप्लाई प्रभावित होने से फैक्टरियां आंशिक या पूरी तरह बंद होने की कगार पर हैं।
भिवाड़ी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रवीण लांबा के अनुसार 400 गैस आधारित इकाइयों पर ताला लगने की नौबत आ गई है। इसमें से 20 बड़ी फैक्टरियां पूरी तरह बंद हो चुकी हैं जबकि 60 से अधिक कंपनियों ने उत्पादन आधा कर दिया है। लगभग 15 से 20 इकाइयों में पूरी तरह प्रोडक्शन बंद है। इससे करीब 25 हजार मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
कई जगहों पर मशीनें पिछले एक महीने से बंद पड़ी हैं। गैस सप्लाई में लगातार कटौती की जा रही है। गेल ने पहले 80 प्रतिशत, फिर 65 प्रतिशत और अब केवल 55 प्रतिशत गैस सप्लाई करने की सूचना दी है। इस कमी के कारण उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और अब तक करीब 1500 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
आगे कहा कि यदि जल्द गैस सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो वर्षों की मेहनत से खड़े उद्योग पूरी तरह बंद हो सकते हैं। ऐसे में सरकार से जल्द हस्तक्षेप की मांग की जा रही है ताकि उद्योगों और रोजगार को बचाया जा सके।
पिछले 30 दिनों से एक भी प्रोडक्ट तैयार नहीं हुआ
सुपर माइका जैसी कंपनियों में पिछले 30 दिनों से एक भी प्रोडक्ट तैयार नहीं हुआ है। वहीं वैशाली इलेक्ट्रोड सहित कई उद्योगों में उत्पादन 40 प्रतिशत तक सिमट गया है। कच्चे माल, खासकर केमिकल्स के दाम भी दोगुने हो गए हैं जिससे उद्योगों पर दोहरी मार पड़ रही है। कई बड़े ऑर्डर समय पर पूरे न होने से रद्द हो रहे हैं और बाजार में साख प्रभावित हो रही है।
इस संकट का सबसे ज्यादा असर मजदूरों पर पड़ा है। कई फैक्टरियों में काम बंद होने के बावजूद मालिक मजदूरों को वेतन देकर रोकने की कोशिश कर रहे हैं ताकि पलायन न हो। वहीं दूसरी ओर गैस की किल्लत के कारण घरेलू स्तर पर भी परेशानी बढ़ गई है जहां मजदूरों को महंगी दरों पर गैस खरीदनी पड़ रही है।