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सुबह 6 बजे से लगा रहे लाइन, फिर भी नहीं मिल रही खाद

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नई अनाज मंडी में खाद के लिए लाइन में खड़ी महिलाएं। संवाद - फोटो : Rewari
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रेवाड़ी। जिले में डीएपी की 1000 एमटी खेप पहुंचने के बाद भी खाद को लेकर किसानों की परेशानी कम नहीं हो रहीं। किसान खाद के लिए सुबह तीन बजे से लाइन लगानी शुरू कर देते हैं। लेकिन फिर भी उन्हें पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल पा रहा है। वहीं खाद केंद्र पर अलग काउंटर की व्यवस्था न होने के कारण महिलाओं को भी पुरुषों के साथ ही लाइन में लगना पड़ रहा। खाद केंद्र पर सोमवार को महिलाओं की संख्या अधिक रहीं। सुबह 6 बजे खाद केंद्र पर पहुंचने वाली महिलाओं को भी दोपहर 12 बजे तक खाद के लिए टोकन दिया गया। लाइन लग रहीं महिलाओं ने खाद की कमी को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
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सरसों की बिजाई के लिए किसानों को खाद की आवश्यकता है। लेकिन खाद न मिलने के कारण किसानों को बिजाई प्रभावित होने का डर सता रहा है। केंद्रों पर लंबी कतार व धूप में खड़े होकर किसान डीएपी खाद लेने के लिए काफी मशक्कत कर रहे हैं। केंद्रों पर न तो समय पर टोकन काटे जा रहे हैं न ही खाद मिल रही है। ज्यादातर किसान खाद न मिलने के कारण मायूस घर लौट रहे हैं। बीते एक सप्ताह से किसानों के साथ खाद न मिलने की समस्या आ रही है। किसानों ने बताया कि एक आधार कार्ड पर सिर्फ 5 डीएपी खाद के कट्टे मिल रहे हैं, जो कि अपर्याप्त हैं। खाद लेने के लिए किसान ट्रैक्टर पर अपने गांव से आता है तो खाद की कीमत मूल रूप से ज्यादा पड़ेगी।
बुजुर्ग महिलाओं के लिए भी नहीं अलग काउंटर
खाद खरीदने के लिए काफी संख्या में महिलाएं भी पहुंच रहीं हैं। कई महिलाओं की आयु लगभग 60 वर्ष हैं। उनको भी खाद के लिए पुरुषों के साथ लाइन में लगना पड़ रहा है। महिलाओं का कहना है कि जिला प्रशासन को महिलाओं के लिए अलग काउंटर बनाना चाहिए।
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जिले को है 10 हजार एमटी डीएपी की आवश्यकता
जिले में बीते सप्ताह उपायुक्त यशेन्द्र सिंह के प्रयासों के डीएपी आपूर्ति करने वाली कंपनी ने रेवाड़ी के लिए रैक में निर्धारित 300 एमटी टन कोटा को बढ़ाकर एक हजार मीट्रिक टन कर दिया। गत शुक्रवार को जिले में एक हजार एमटी डीएपी की खेप भी आ गई थी। लेकिन रबी की फसल की बिजाई के लिए लगभग 10 हजार एमटी डीएपी की आवश्यकता है। जबकि अभी तक जिले को 2500 एमटी डीएपी ही मिला है। वहीं सरकारी केंद्रों पर जहां डीएपी की कीमत 1200 रुपये प्रति बैग है वहीं प्राइवेट दुकानदार इसी बैग को 1400 से 1500 की कीमत में बेच रहे हैं। साथ ही दुकानदार किसानों को रबी की फसल में उपयोग के लिए खरपतवार कीटनाशक भी जबरदस्ती थोप रहे हैं, जिससे किसानों को एक बैग काफी मंहगा पड़ रहा है।
महिलाएं बोलीं-
किसानों को खाद न मिलने से परेशानी हो रही है। हम सुबह सात बजे यहां पहुंच गए थे। हमें पांच घंटे हो गए लाइन में लगे हुए। अभी तक टोकन नहीं मिला। खाद नही मिल पाई तो समय पर बिजाई नही हो पाएगी।
- रमता देवी, जांटी
मैं अपने परिवार के सदस्यों के साथ 6 बजे ही यहां पहुंच गई थी। अभी तक हमारा नंबर नहीं आया है। सरसों की फसल की बिजाई का समय आ गया है। अभी खाद की सख्त जरूरत है। सरकार खाद को उचित व्यवस्था करनी चाहिए।
- माया, माजरी गोधा
किसानों को एक आधार कार्ड पर पांच कट्टे दिए जा रहे हैं जो अपर्याप्त हैं। मांग के अनुरूप खाद नहीं मिल रही है। सीमित मात्रा में खाद मिलने से आधी अधूरी बिजाई हो सकेगी। सरकार को इन दिनों में खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करानी चाहिए।
- सरोज देवी, किशनगढ़ बालावास
मैं सुबह तीन बजे आकर लाइन में लगी थी। नंबर नहीं आया तो थककर बैठ गई। थोड़ी देर आराम करने से बाद फिर से लाइन में लगूंगी। इससे पहले तो कभी खाद की कमी नहीं हुई। सरकार को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध करानी चाहिए।
- लाली देवी, खलीलपुर।
वर्जन-
केंद्र पर जो बैग आए हैं उनका वितरण किया जा रहा है। किसानों को किसी तरह की कोई समस्या न हो इसके लिए हम प्रयास कर रहे हैं। जल्द ही महिलाओं के लिए अलग काउंटर की व्यवस्था की जाएगी।
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- आशीष पंवार, क्षेत्रिय अधिकारी, इफ्को केंद्र
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