रेवाड़ी। हरियाणा सरकार 15 मार्च तक स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान चला रही है। इस दौरान आमजन को कुष्ठ रोगियों के प्रति सहानुभूति रखने और हर परिस्थिति में इनकी मदद करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। लोग ऐसे व्यक्तियों के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं करें। कुष्ठ रोगी भी समाज के अभिन्न अंग हैं और इनको पूरा मान-सम्मान दिया जाना चाहिए। उक्त बातें डीसी यशेंद्र सिंह ने कहीं हैं।
उन्होंने कहा कि हमारा प्रदेश तेजी से कुष्ठ मुक्ति की ओर बढ़ रहा है। अगर किसी व्यक्ति को कुष्ठ रोग की शंका हो तो वह अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर इस संबंध में जांच कराए। ताकि समय रहते इसका पता चल सके। ऐसा होने से जल्द इलाज शुरू होगा और विकलांगता नहीं होगी। स्वास्थ्य विभाग 15 मार्च तक निरंतर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करके लोगों को इस रोग के प्रति जागरूक करेगा। सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि कुष्ठ रोग माइको बैक्टीरियम लेप्री नामक जीवाणु से होता है। यह रोग किसी के साथ खाने व बैठने से नहीं फैलता है। यह आनुवांशिक एवं छुआछूत रोग भी नहीं है। समय से जांच और उपचार कराने से दिव्यांगता से भी बचा जा सकता है। उन्होंने जनमानस से अपील की है अगर त्वचा पर दाग देंखे और उस पर सुनापन लगे तो तुरंत जांच कराएं, जिससे कुष्ठ रोग व विकलांगता से बचा जा सके ।
कुष्ठ रोग के लक्षण :
सिविल सर्जन ने कहा कि कुष्ठ रोग के लक्षण में मांसपेशियां में कमजोरी आ जाना, हाथ-पैर काम करना बंद कर सकते हैं। नाक से खून या आंखों में सूजन की समस्या बढ़ सकती है। हाथ-पैर की उंगलियां टेढ़ी-मेढ़ी हो सकती है, पलकों या भौंहों जैसी जगहों से बाल उड़ सकते हैं। सुई लगने पर दर्द महसूस न होना, हथेली अथवा पैर के तलवे में भी सुन्नपन हो तो कुष्ठ की जांच अवश्य कराएं।