भिवाड़ी। प्रसूता किंजलबेन (24) की मौत के मामले में इलाज में देरी और मॉनिटरिंग की गंभीर कमियां सामने आई हैं। प्रसूता की मौत की जांच शुरू कर दी गई है। 5 डॉक्टरों की टीम गठित की गई है।
पीड़िता का भिवाड़ी के फलसा गांव स्थित किराये के मकान में समय से पहले प्रसव हो गया था, जिसमें नवजात की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद अत्यधिक रक्तस्राव और गंभीर स्थिति में महिला को पहले निजी और बाद में जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मामले में बीसीएमएचओ मनोज यादव ने बताया कि महिला की मौत के मामले में 5 सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। टीम की जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
किंजलबेन ने 16 जुलाई को चौपानकी पीएचसी और 22 जुलाई को जिला अस्पताल में जांच व टीकाकरण कराया था। दोनों स्थानों पर जांच होने के बावजूद चिकित्सा तंत्र की मॉनिटरिंग प्रणाली महिला को हाई रिस्क प्रेगनेंसी की सूची में चिह्नित करने में नाकाम रही।