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घायलों और गंभीर मरीजों को नहीं करना पड़ेगा रेफर, 10 बेड का बनेगा आईसीयू

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सड़क दुर्घटनाओं से लेकर अन्य परिस्थितियों में घायल और गंभीर मरीजों को नागरिक अस्पताल व ट्रॉमा सेंटर से रेफर नहीं करना पड़ेगा।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से नागरिक अस्पताल के नए भवन में घायल व गंभीर मरीजों के लिए जीवन दायक गहन चिकित्सा विभाग (आईसीयू) खोलने की मंजूरी दे दी गई है। लोक निर्माण विभाग की ओर से अस्पताल का निरीक्षण करने के बाद आईसीयू बनाने के लिए टेंडर ओपन किया गया है। करीब 56 लाख रुपये की लागत से 25 मार्च को टेंडर देने के बाद इस पर काम शुरू हो जाएगा। वहीं करीब दो करोड़ रुपये की मशीन आईसीयू में लगाई जाएंगी, इसके अलावा मरीजों को चौबीसों घंटे विशेषज्ञ चिकित्सक मिल सकेंगे। बता दें कि जिले में चार नेशनल हाईवे गुजरते हैं। इसके चलते दुर्घटनाएं होने की संभावना भी बनी रहती हैं, आईसीयू नहीं होने के चलते मरीजों को रोहतक रेफर करना पड़ता है। कई बार मरीज रास्ते में दम तोड़ देते हैं। जिले में प्रत्येक साल औसतन 200 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत होती है। आईसीयू बनने के बाद उम्मीद है कि कुछ जरूरतमंद लोगों की जान बचाई जा सकती है।
ट्रॉमा सेंटर में आईसीयू सबसे जरूरी
ट्रॉमा सेंटर का निर्माण ही जल्द से जल्द घायलों को बेहतर उपचार देने के लिए किया जाता है। घायलों में ज्यादा रक्तश्राव होने से जान का खतरा होता है। ऐसे में ट्रॉमा सेंटर में आए घायलों ऑक्सीजन व अन्य सुविधाओं के लिए आईसीयू में रखा जाता है। ऐसे में किसी भी ट्रॉमा सेंटर में आईसीयू सबसे जरूरी सेवाओं में से एक है। इसके अलावा एक सर्जन, ऐनेस्थेटिक, ऑर्थोपेडिक सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, ईएमओ सहित अन्य चिकित्सकों की नियुक्त होती है। इसके अलावा स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वाय, फार्मासिस्ट सहित अन्य कर्मचारियों का स्टाफ होता है। संसाधनों में आधुनिक उपकरण, मोबाइल कलर एक्सरे, डिजिटल अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है। आईसीयू बनने से अब ट्रॉमा सेंटर के अलावा नागरिक अस्पताल में भर्ती मरीजों व गर्भवती महिलाओं को भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद की जा सकती है।
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चौबीसों घंटे चार चिकित्सकों की नियुक्ति चुनौती
ट्रॉमा सेंटर में जहां 10 साल बीत जाने के बाद भी आईसीयू तो दूर चिकित्सकों की स्थायी नियुक्ति नहीं हो पाई है, वहीं नागरिक अस्पताल भी 200 बेड का बनने के बाद डॉक्टर व पैरा मेडिकल स्टाफ का अभाव है। ऐसे में आईसीयू में चौबीसों घंटे चार चिकित्सकों की तैनाती चुनौती से कम नहीं है। बता दें कि मई 2019 को नागरिक अस्पताल में बेड की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 की घोषणा की गई थी। लेकिन यहां पर 100 बेड के हिसाब से भी पर्याप्त स्टाफ नहीं है। स्टाफ नर्स की 90 पोस्ट प्रस्तावित हैं लेकिन कार्यरत महज 26 हैं। 200 बेड के अस्पताल के हिसाब से स्टाफ नर्स की प्रस्तावित पोस्ट बढ़कर 180 व डॉक्टर की 110 हो चुकी हैं। लेकिन दोनों मामलों में आधे पद खाली हैं।
ट्रॉमा सेंटर को नागरिक अस्पताल से जोड़ना भी इसी का हिस्सा
ट्रॉमा सेंटर को नागरिक अस्पताल से जोड़ने के लिए फुट ओवरब्रिज के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। इसमें नागरिक अस्पताल में लगे ट्रांसफार्मर आदि को हटाने का कार्य भी चल रहा है। नए भवन में आईसीयू बनने से ट्रॉमा सेंटर के मरीजों को भी नागरिक अस्पताल में आसानी से लाया जा सकेगा। अब तक ट्रॉमा सेंटर से मरीजों को सड़क के बीच से लेकर आना पड़ रहा है।
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निश्चित रूप से आईसीयू बनने के बाद मरीजों को रेफर नहीं करना पड़ेगा। सबसे ज्यादा लाभ ट्रॉमा सेंटर में आने वाले घायलों को मिलेगा। अतिरिक्त ब्लॉक में आईसीयू बनाने का प्रपोजल पीडब्ल्यूडी को भेजा गया था। वहीं ट्रॉमा सेंटर को नागरिक अस्पताल से जोड़ने के लिए भी काम चल रहा है।
डॉ. सर्वजीत थापर, पीएमओ, नागरिक अस्पताल।
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