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विद्यार्थी संगठनों का संघर्ष लाया रंग, आईजीयू ने पांच संकायों में बढ़ाईं 80 सीटें

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मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय। - फोटो : Rewari
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रेवाड़ी। दो वर्ष पहले घटाई गई सीटों को बढ़ाने की मांग कर रहे छात्र संगठनों की मेहनत रंग लाई है। आईजीयू प्रशासन ने 5 विषयों में 80 सीटें बढ़ाने का पत्र जारी कर दिया है।
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बता दें कि सत्र 2019-20 में आईजीयू प्रशासन ने लैब व शिक्षकों की कमी का हवाला देकर कई संकायों में सीटों की संख्या 60-60 घटाकर 20-20 कर दी थी। सीटों की संख्या कम होने के बाद छात्र संगठनों की ओर से लगातार सीटें बढ़ाने की मांग की जा रही थी। इस सत्र से सीटें बढ़ाने की मांग को लेकर छात्र संगठनों द्वारा धरना प्रदर्शन किए जा रहे थे। पिछले सप्ताह विवि प्रशासन को आखिरकार विद्यार्थियों की मांगों के आगे झुकना पड़ा। विवि प्रशासन ने विद्यार्थियों को जल्द ही सीटें बढ़ाने का आश्वासन दिया था। सोमवार को आईजीयू की ओर से पत्र जारी कर कुछ विषयों में सीटें बढ़ा दी गई हैं। विभाग की ओर से जारी पत्र के अनुसार इन विषयों की दाखिला प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
इन विषयों की बढ़ी हैं सीटें:
आईजीयू प्रशासन ने एमएससी ज्योग्राफी की सीटें 20 से बढ़ाकर 40 कर दी हैं। एमएससी बॉटनी की 20 से 35, एमएससी ज्यूलॉजी 20 से 35, एमएससी एंवायरमेंटल साइंस की 20 से 35, एमएससी फिजिक्स की 20 से 35 सीटें कर दी गई हैं। इससे पहले इन विषयों में 60 सीटें थी।
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इनेसो के यूनिवर्सिटी अध्यक्ष रवि मसीत ने कहा कि इनसो द्वारा लगातार सीटें बढ़ाए जाने की मांग की जा रही थी। कुछ विषयों में सीट बढ़ाई गई हैं। विवि प्रशासन को विद्यार्थियों की जरूरत के हिसाब से अगले सत्र में भी सीटें बढ़ानी चाहिए। सीटें कम होने की वजह से जिले के विद्यार्थियों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए दूसरों जिलों में जाना पड़ता है। अगर आईजीयू में सभी कोर्स की सीटें उपलब्ध रहेंगी तो मध्यम वर्ग संबंध रखने वाले विद्यार्थियों को काफी फायदा मिलेगा।
इधर, अभाविप के प्रांत मीडिया प्रभारी सौरभ यादव ने कहा कि अभाविप लंबे समय सीटें बढ़ाने की मांग कर रही थी। आईजीयू में सीटों की संख्या में बढ़ोतरी होने के बाद विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में अहम भूमिका निभाएगी। आईजीयू में गांवों से मध्यम वर्ग परिवार के बच्चे भी पढ़ने आते हैं। अगर यूनिवर्सिटी में सीटें नहीं होगी तो विद्यार्थियों को दूसरे जिलों में शिक्षा ग्रहण करने के लिए जाना पड़ेगा। इसलिए विवि प्रशासन को विद्यार्थियों की मांग के अनुसार सीटें बढ़ानी चाहिए।
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