संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। होली से 8 दिन पहले लगने वाला होलाष्टक 7 मार्च से शुरू होगा। अष्टमी तिथि 6 मार्च को सुबह 10:50 से ही शुरू हो रही है। 13 मार्च को भद्रा के बाद होलिका दहन होगा।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी से होलाष्टक आरम्भ होगा, जो होलिका दहन पूर्णिमा तक रहेगा। इस दौरान विवाह, मुंडन संस्कार, ग्रह प्रवेश, जनेऊ आदि कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त नहीं रहेंगे। इस दौरान पूजा पाठ, जप तप, हवन और विशेष रूप से विष्णु भगवान की आराधना करना श्रेष्ठकर होती है। होली एक सांस्कृतिक, धार्मिक और पारंपरिक त्योहार है। पूरे भारत में इसका अलग ही जश्न देखने को मिलता है। आपसी प्रेम और सद्भावना का त्योहार है। रात्रि व्यापिनी पूर्णिमा को भद्रा उपरांत होलिका दहन करने का विधान शुभ माना गया है। फाल्गुन शुक्लपक्ष पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है। इस साल फाल्गुन पूर्णिमा 13 मार्च सुबह 10:36 से अगले दिन 14 मार्च को 12:23 तक रहेगी। पूर्णिमा लगते ही भद्रा लग जाएगी। भद्रा में होलिका दहन निषेध हैं।