धारूहेड़ा (रेवाड़ी)। हरियाणा सरकार ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की है। इस रिपोर्ट में प्रदेश में चल रहे कचरा प्रबंधन कार्यों की स्थिति और भविष्य की कार्ययोजना का पूरा ब्योरा दिया गया है।
रेवाड़ी के गांव खरखड़ा निवासी प्रकाश यादव ने ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर एनजीटी में याचिका दायर की थी। सरकारी हलफनामे के अनुसार प्रदेश के 87 शहरी निकायों में कचरा प्रसंस्करण स्थलों की पहचान कर ली गई है।
वहीं 75 लीगेसी अपशिष्ट डंपिंग साइट्स में 60 का निस्तारण वैज्ञानिक जैव-खनन (बायो-माइनिंग) के माध्यम से किया जा चुका है। शेष 15 डंपिंग साइट्स को 31 मार्च 2027 तक पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
सरकार ने कचरा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए जिला स्तर पर संयुक्त ई-निविदा प्रणाली लागू करने की योजना भी बताई है।
साथ ही अब तक नियमों के उल्लंघन पर 7.63 करोड़ रुपये से अधिक का पर्यावरण मुआवजा लगाया गया है तथा 3,486 चालान जारी कर 23.25 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया है।
रिपोर्ट में प्लास्टिक और पैकेजिंग कचरे को लेकर विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व के तहत 105 कंपनियों को जवाबदेह बनाया गया है, जिनमें निर्माता, आयातक और ब्रांड मालिक शामिल हैं।
इन सभी को अपने उत्पादों से उत्पन्न कचरे को वापस एकत्रित कर वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित करना होगा। इसके अलावा प्रदेश में 14,889 कबाड़ बीनने वालों की पहचान की गई है, जिनमें से 5,356 का पंजीकरण किया जा चुका है।
217 स्वयं सहायता समूह और 1,515 वार्ड समितियां भी कचरा प्रबंधन से जोड़ी गई हैं। सरकार के अनुसार लगभग 70 प्रतिशत कचरे का स्रोत स्तर पर ही पृथक्करण किया जा रहा है।