रेवाड़ी। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत मंगलवार को खंड खोल के गांव लुहाना में एक दिवसीय प्राकृतिक खेती शिविर का आयोजन किया गया। इसमें शामिल 50 किसानों ने प्राकृतिक खेती करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कृषि उपनिदेशक डॉ. जितेंद्र अहलावत ने कहा कि रासायनिक खाद, कीटनाशक और महंगे बीजों पर होने वाला खर्च किसानों की आय को कम कर देता है। यदि किसान देसी गाय के गोबर और गोमूत्र जैसे घरेलू संसाधनों का उपयोग करें तो खेती की लागत काफी कम हो सकती है और लाभ बढ़ सकता है।
कृषि अधिकारी डॉ. मनोज वर्मा ने मिट्टी में लगातार घटते कार्बन स्तर पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से उपजाऊ भूमि कठोर परत में बदलती जा रही है। प्राकृतिक खेती मिट्टी को पुनर्जीवित करने का अभियान है, जिसमें जीवामृत जैसे प्राकृतिक उपाय मिट्टी की संरचना सुधारने और जल धारण क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं।
खंड कृषि अधिकारी डॉ. मनोज ने किसानों को मित्र कीटों का महत्व बताया। उन्होंने बताया कि लेडीबग, मकड़ी और मधुमक्खी जैसे मित्र कीट फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करते हैं।
उन्होंने किसानों को नीम अस्त्र, ब्रह्मास्त्र और दशपर्णी अर्क जैसी प्राकृतिक औषधियों को तैयार करने की विधि बताई। सरपंच मामचंद और नंबरदार भाल सिंह ने विभाग की पहल की सराहना की।
प्रगतिशील किसान महीपाल ने प्राकृतिक खेती से जुड़े अपने अनुभव साझा कर अन्य किसानों को प्रेरित किया। शिविर में माडू पंच, इंद्रजीत, नरेंद्र, रिषिपाल और रोशन लाल सहित गांव लुहाना और आसपास के क्षेत्रों के 50 से अधिक किसान मौजूद रहे।