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किसानों को नहीं मिल रही पर्याप्त खाद

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जिले में सरसों की बुवाई के लिए कुछ ही दिन बचे हैं। खाद की किल्लत के चलते किसानों को पर्याप्त खाद नही मिल पा रही है। कृषि विभाग के अनुसार सरसों की बुवाई का समय 5 नवंबर तक हैं। खाद न मिलने से किसानों को दर-दर भटकना पड़ रहा है। इसके अलावा सरकारी केंद्रों में पिछले कई दिनों से खाद की रैक नहीं आई है। निजी केंद्रों में भी खाद का टोटा हो गया है। बुधवार को दो निजी केंद्रों में खाद के 700 कट्टे ही किसानों को दिए गए। जहां एक केंद्र में 500 व दूूसरे केंद्र में सिर्फ 200 कट्टे ही खाद मिल पाई। किसानों ने बताया कि निजी केंद्रों में तीन ट्रक खाद के उतरे थे। सिर्फ 500 कट्टे ही खाद के दिए गए। वहीं दूसरे केंद्र पर खाद समाप्त होने की सूचना तक नही दी गई थी। किसान खाद के लिए दर-दर भटकते हुए मिले। खाद न मिलने से किसानों ने रोष भी जताया।
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खाद के लिए किसान दर-दर भटकने को मजबूर है। जहां निजी केंद्रों पर खाद का टोटा होने लगा है, वहीं सरकारी केंद्रों पर खाद आने में अभी तीन से चार तीन का समय ओर लग सकता है। बुधवार को 70 मीट्रिक टन ही किसानों को खाद दिया गया। इफको के अधिकारी अनुसार खाद के रैक आने में अभी तीन से चार दिन का समय लग सकता है। खाद आने की पुख्ता सूचना अभी नही मिल पाई है।
जिले में अभी तक 12515 मीट्रिक टन खाद आ चुका है लेकिन अभी भी जिले को 21 हजार मीट्रिक टन खाद की जरूरत है। वहीं किसानों के लिए पर्याप्त खाद न मिलने से उनकी चिंता बढ़ती जा रही है। वहीं पिछले साल किसानों को लगभग 18116 मीट्रिक टन खाद मिल चुकी थी। अभी तक जिले को 6 हजार मीट्रिक टन खाद कम मिली है।
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कृषि विभाग के अनुसार सरसो की बुवाइ जिले में 75 प्रतिशत हो चुकी है। अभी सिर्फ 25 प्रतिशत बुवाई बची हुई है। कृषि विभाग के अनुसार अमूमन हर साल 15 से 30 अक्तूबर तक सरसों की बिजाई का समय रहता है मगर बारिश के कारण इस बार 5 नवंबर तक किसान सरसों की बुवाइ कर सकते है। इसके बाद गेहूं व जौ की खेती किसान कर सकते है।
जिले में 75 प्रतिशत सरसों की बुवाई हो चुकी है। बारिश के कारण बुवाई का समय बढ़ा है। इसके अलावा जिले में खाद की भी कोई कमी नही है। किसानों में खाद को लेकर भय की स्थिति बनी हुई है। जिले में सिर्फ 25 प्रतिशत सरसों की बुवाई बची हुई है। वो भी तय समय पर पूूरी होने की उम्मीद है। गेहूं को लेकर भी खाद की जरूरत है इसको लेकर भी किसानों में खाद को लेकर मारामारी की स्थिति है। डॉ. अनिल कुमार, कृषि खंड अधिकारी, जाटूसाना।
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