रेवाड़ी। नगर परिषद और लोक निर्माण विभाग की ओर से शहर में करीब 10 करोड़ की लागत से स्ट्रीट लाइट लगाई गईं हैं। इनमें अधिकतर लाइट खराब पड़ी हैं। इससे रात के समय लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं हादसों, चोरी और लूटपाट का भी भय बना रहता है। नगरवासियों का कहना है कि शिकायत के बाद भी प्रशासन और नगर परिषद इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
शहर के सर्कुलर रोड से लेकर दिल्ली रोड व सबसे पॉश कहे जाने वाले गढ़ी बोलनी, रोड नारनौल रोड तमाम ऐसे मुख्य रास्ते हैं, जहां पर रात के समय अधिकतर स्ट्रीट लाइट बंद रहती हैं। हालात इतने बदतर है कि शहर के सेक्टर 4 की डिस्पेंसरी व कम्युनिटी हॉल के सामने तक वर्षों से लाइटें खराब पड़ी हैं, जिनका आज तक सुधार नहीं किया गया। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने नगर परिषद को लाइट हस्तानांतरित (हैंडओवर) करने की बात कहकर जहां पल्ला झाड़ लिया है, वही नगर परिषद में इस संबंध में कोई सुनने वाला तक नहीं है।
चार वर्ष पहले 67 लाख खर्च कर लगाई गई थीं झूमर लाइट
रोहतक व अंबाला की तर्ज पर लोक निर्माण विभाग की ओर से करीब चार वर्ष पहले सुल्तान नाम के खंभे पर झूमर लाइट लगाई गईं थीं। इस पर करीब 67 लाख रुपये का खर्च आया था। सर्कुलर रोड की अधिकतर लाइट रात के समय बंद पड़ी हुई देखी जा सकती हैं।
पायलट चौक से कसौला चौक तक नहीं जली लाइट नहीं जली
शहर के आंबेडकर चौक से कसौला चौक तक, महेंद्रगढ़ रोड पर 1 किमी. तक, नारनौल रोड पर दो किमी., बेरली रोड पर 2.5 किमी. तक, भाड़ावास रोड पर 2 किमी. तक लाइट लगाई गई थीं। इन पांच मुख्य सड़कों पर लाइट लगाने में 4 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आने का दावा किया गया था, लेकिन हालात यह है कि आज तक अधिकतर लाइट जल नहीं पाई हैं। गढ़ी बोलनी रोड पर लंबे समय तक बिजली कनेक्शन का मसला चलता रहा, मसला मंत्रियों तक पहुंचा लेकिन आज तक समाधान नहीं हो पाया है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद पायलट चौक से लेकर कसौला चौक तक लगी लाइटें आज तक चल नहीं पाई है। वही हालात इस कदर खराब है कि दिल्ली रोड गढ़ी बोलनी रोड व अन्य रोड पर लाइट अधिकतर समय बंद पड़ी हुई देखी जा सकती हैं।
शहर को भी रोशन नहीं कर पाई नप
नगर परिषद अधिकारियों के कुप्रबंधन और लापरवाही के चलते 5.42 करोड़ रुपये की लागत से 31 वार्डों में लगाई गई 10428 लाइट भी शहर को रोशन नहीं कर सकीं। नियमानुसार 18 से 24 मीटर चौड़ी रोड पर 90 वाट व चौड़ी सड़कों पर 24 से 45 वाट की एलईडी लाइट लगाई जानी थी, लेकिन कर्मचारियों ने जहां एक की जरूरत थी, वहां चार लगा दी और कहीं पर एक भी नहीं लगाई। लाइट नहीं होने के कारण शहर के अनेक हिस्सों में रात के समय अंधेरा रहता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि विभाग ने अपने करीबी और रसूखदार लोगों के घरों के आसपास नियमों को दरकिनार कर लाइट लगा दी है। शहर के सबसे बड़े हिस्से सेक्टर 4 में स्थिति ज्यादा खराब भी है, वहीं आकर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, हुड्डा डिस्पेंसरी में पोशवाल चौक से लेकर सैनिक स्कूल तक इक्का दुक्का लाइट होने के चलते अंधेरा छाया रहता है। वहीं, रेवाड़ी शहर के वार्ड नंबर 19 में सबसे ज्यादा 567 लाइट लगी है।
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वर्जन
लोक निर्माण विभाग की ओर से अधिकतर लाइट को नगर परिषद को हस्तानांतरित कर दिया गया है। सरकार के आदेश अनुसार अब लोक निर्माण विभाग नहीं लाइट लगाता और न ही बिजली का कनेक्शन देता है। ऐसे में जिम्मेदारी नगर परिषद की है। बाकी जो लाइट हमारे पास हैं, उसकी जांच कराकर उसको दुरुस्त कराया जाएगा।
-अमित गोयल, कार्यकारी अभियंता लोक निर्माण विभाग, इलेक्ट्रिक विंग।
शहरवासियों के वर्जन
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शहर के मुख्य रास्तों की स्ट्रीट लाइट खराब होने से रात के समय हादसा और लूटपाट का भय बना रहता है। वहीं आमजन आवागमन में भी काफी परेशानी होती है। नगर परिषद की ओर से लाखों रुपये खर्च के लाइट लगवाई गई थी, फिर इनकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
- मुरारी
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शहर की गलियों में लगी स्ट्रीट लाइट अधिकतर खराब पड़ी हैं। कई बार नगर परिषद में शिकायत देने के बाद भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। रात के समय चोरी और लूटपाट होने का भय बना रहता है। शहर के बोलनी रोड पर लगाई गई सुलतान लाइटें भी कई स्थानों पर खराब पड़ी हैं।
-साहिल