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शिक्षक - कुशल शिल्पकार, विश्वविद्यालय के शिक्षकों की समाज में महत्ती भूमिका - राज्यपाल

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रेवाड़ी। इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी मीरपुर के 10वें स्थापना दिवस समारोह में शुक्रवार को राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय शिरकत करने पहुंचे। बतौर मुख्यातिथि राज्यपाल ने संबोधित किया कि इस मंच ने शहीद राव तुलाराम के बलिदान की सराहना कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने कहा कि हरियाणा वीरों और शहीदों की धरती है और यह देश हमारे पूर्वजों के दिए बलिदान की वजह से ही अमृत महोत्सव मना रहा है। हमें कभी भी इनके बलिदान को नहीं भूलना है क्योंकि इन्होंने अंग्रेजों से लोहा लेते हुए देश को आजादी दिलाई। कुछ दिन पहले मैंने शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को उनकी सेवाओं के लिए सम्मानित किया। हमारे देश में गुरु-शिष्य की अनूठी परंपरा चल रही है। हमें गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं। प्राचीनकाल में आश्रम में पेड़ के नीचे बैठकर शिष्य ज्ञान लेते थे और अब वक्त बदला है और ज्ञान का रूप डिजिटल शिक्षा ने लिया है। उन्होंने शिक्षक को कुशल शिल्पकार बताते हुए विश्वविद्यालय के शिक्षकों की देश एवं समाज के निर्माण में महती भूमिका बताई।
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नई शिक्षा नीति नए रोजगार के अवसर पैदा करेगी
उन्होंने विद्यार्थियों को एक पौधे की तरह बताते हुए इसे विकसित करने में शिक्षक की भूमिका पर प्रकाश डाला। राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई शिक्षा नीति लागू करने की सराहना करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति देश और समाज में क्रांति का नया रूप लेकर आने वाली है। इसमें रोजगारोन्मुखी ज्ञान पर जोर दिया जा रहा है। यह देश में नए रोजगार के अवसर पैदा करेगी। अब युवा अपनी मातृभाषा में एमबीबीएस और बीटेक की पढ़ाई कर सकेंगे।
अगर चरित्र चला जाता है तो सब कुछ खत्म हो जाता है
राज्यपाल ने युवाओं से कहा कि केवल किताबी ज्ञान या उपाधि लेकर नौकरी लेने वाला नहीं बनना। अब हमें नौकरी देने वाला बनना है। उन्होंने कहा कि मुझे यहां पता चला कि इस क्षेत्र के लोग सामाजिक समरसता वाले लोग रहते हैं। यह मुझे भी महसूस हुआ। नेता जी सुभाष चंद्र की सेना में भी सामाजिक समरसता दिखाई देती है और यह बहुत बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि अगर दौलत चली जाती है, जीवन से कुछ चला जाता है। अगर स्वास्थ्य चला जाता है तो बहुत कुछ चला जाता है और अगर चरित्र चला जाता है तो सब कुछ खत्म हो जाता है। इसलिए हमें अपने आपको चरित्रवान बनाना है।
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कार्यक्रम की झलकियां
- राज्यपाल के आगमन के बाद से विश्वविद्यालय परिसर के आसपास कड़ी सुरक्षा दिखी।
- कुलपति के आवास के द्वार पर स्वतंत्रता सेनानी के परिजन ने किया हंगामा।
- समयाभाव की वजह से दो सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं हुए।
- बड़ी चूक, मंच संचालक ने राज्यपाल के हाथों डीसी के सम्मान की बात कही, मगर सम्मान मिला भाजपा जिलाध्यक्ष को।
- बाद में हुआ डीसी और एसपी का सम्मान।
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