रेवाड़ी। सिविल जज जूनियर डिवीजन अनिल की अदालत ने 31 साल से लापता मनेठी निवासी कुलदीप उर्फ कुलदीप सिंह को कानून की नजर में मृत घोषित कर दिया है। अदालत ने यशपाल की ओर से दायर घोषणा संबंधी याचिका को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया।
यशपाल और कुलदीप उर्फ कुलदीप सिंह आपस में भाई थे। याचिका में बताया गया कि कुलदीप अप्रैल 1991 में अचानक लापता हो गए थे। परिवार ने काफी तलाश की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिल सका।
इसके बाद पुलिस थाना खोल में 18 अगस्त 2013 को गुमशुदगी संबंधी डीडीआर दर्ज कराई गई। पुलिस स्तर पर तलाश के अलावा सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर लगाए गए और समाचार पत्रों व दूरदर्शन के माध्यम से भी सूचना प्रसारित कराई गई, लेकिन कुलदीप का कोई पता नहीं चला।
अदालत में याचिकाकर्ता की ओर से छह गवाह पेश किए गए, जिनमें यशपाल, ग्रामीण जसवंत सिंह, ग्राम पंचायत मनेठी के सरपंच देशराज, नंबरदार सुल्तान, रामनिवास और कुलदीप के भाई बुद्धि प्रकाश शामिल थे। गवाहों ने बताया कि कुलदीप को वर्षों से किसी ने नहीं देखा और न ही उनके बारे में कोई जानकारी मिली।
अदालत ने सभी दस्तावेजों और गवाहियों के आधार पर कहा कि कुलदीप उर्फ कुलदीप सिंह के सात वर्ष से अधिक समय तक लापता रहने के कारण उन्हें कानून की नजर में मृत घोषित किया जाना उचित है। अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए कुलदीप को मृत घोषित करने की डिक्री जारी कर दी।