रेवाड़ी। जिले में अब तक एक ही दिन में सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमित मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वीरवार को 359 कोरोना संक्रमितों की पुष्टि हुई, जो कि एक ही दिन सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमित मिलने का रिकॉर्ड है। सबसे ज्यादा 199 कोरोना संक्रमित रेवाड़ी में मिले है। जिले में वीरवार को कोरोना के तीहरे शतक लगने के बाद कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या 879 हो चुकी है। जबकि राहत की बात यह है कि वीरवार को 175 मरीजों ने कोरोना को मात दी है।
जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से वीरवार को 1502 सैंपल लिए गए। वहीं 1117 की रिपोर्ट लंबित है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को कोरोना नियमों का पालन करने की हिदायत दी जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए जिले में संक्रमण दर 3.96 प्रतिशत है। वहीं मृत्यु दर 1.17 प्रतिशत है। कोरोना संक्रमण से स्वस्थ्य होने वालों का दर 94.86 प्रतिशत है। जिला प्रशासन की ओर से टोल फ्री नंबर 1950 शुरू किया गया है। जिसकी मदद से 24 कोविड से संबंधित स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली जा सकती है। वहीं आमजन को स्वास्थ्य सेवा व कोरोना से बचाव की जानकारी के लिए स्वास्थ्य हेल्पलाइन नंबर 946677510, 01274-250764 व 01274-256086 पर भी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में अब तक 560315 सैंपल लिए जा चुके है। जिसमें अब तक 21000 ने कोरोना को मात दी है। वहीं अब तक जिले में 22137 कोरोना संक्रमित मिल चुके है। जिले में वीरवार को 1502 सैंपल लिए गए और अभी 1117 सैंपल की रिपोर्ट लंबित है। इसके अलावा जिले में सबसे ज्यादा रेवाड़ी से 199, बावल से 38, मीरपुर से 46, नाहड़ से 17, गुरावड़ा से 31 व खोल खंड से 28 कोरोना मरीजों की पुष्टि हुई है।
16 से 20 जनवरी के बीच मिले कोरोना संक्रमित
तारीख मिले केस
20 जनवरी 359
19 जनवरी 210
18 जनवरी 193
17 जनवरी 278
16 जनवरी 152
नागरिक अस्पताल में पीआईसीयू केंद्र स्थापित
स्वास्थ्य विभाग की ओर से किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए सतर्कता बरती गई है। नागरिक अस्पताल में वेंटीलेटर और अन्य सुविधाओं से युक्त बाल चिकित्सा गहन देखभाल इकाई (पीआईसीयू) केंद्र स्थापित किया गया है ताकि किसी भी बच्चे को दिक्कत होने पर तत्काल उपचार किया जा सके। पिछले चार दिनों के दौरान जिले में 46 बच्चे कोरोना संक्रमित मिले हैं। इनकी उम्र 16 साल से कम है। अभी तक सभी बच्चे घर पर स्वजन और स्वास्थ्य विभाग के टीम की निगरानी में हैं। बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि जिन घरों में माता-पिता या अन्य स्वजन संक्रमित हो रहे हैं उनके संपर्क में आने से बच्चों पर असर पड़ रहा है। जब तक बच्चों को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं तब तक उनका सीटी स्कैन करने की जरूरत नहीं है। इसके अलावा बच्चों में रेमडेसिविर या किसी प्रकार की एंटीबायोटिक दवा देने से बचना चाहिए। नागरिक अस्प्ताल के बाल रोग विशेषज्ञ डा. मदन यादव का कहना है कि विभिन्न प्रकार के अनुसंधान और आकलन के आधार पर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा बच्चों में कोविड संक्रमण के 11 लक्षण बताए गए हैं। ये लक्षण मौसमी बीमारियों की तरह हैं। इन लक्षणों में मुख्य रूप से चार दिनों से लगातार बुखार आना, सामान्य आक्सीजन स्तर 94 प्रतिशत से कम होना, हाथ पैर का ठंडा पड़ना, सांस तेज चलना, त्वचा में चकत्ते पड़ना, आंखों और जीभ में लाली, हाथों और पैरों की त्वचा में सूजन, खाना कम करना, बच्चे का सुस्त पड़ना, मूत्र उत्पादन कम होना शामिल हैं।