संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर विश्वविद्यालय के अनुबंधित असिस्टेंट प्रोफेसरों का प्रतिनिधिमंडल चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की। उन्होंने अनुबंधित असिस्टेंट प्रोफेसरों को समायोजित कर रोजगार सुरक्षित करवाने की मांग की।
हुकटा के पदाधिकारियों ने सीएम को बताया कि शीतकालीन विधानसभा सत्र में विश्वविद्यालयों के 1443 अनुबंधित असिस्टेंट प्रोफेसरों को कॉलेज के एक्सटेंशन लेक्चरर की तरह नौकरी की सेवा सुरक्षा सेवानिवृत्ति 60 वर्ष तक करने का वादा किया था, ताकि नौकरी छूटने के भय के कारण हर समय बेरोजगारी की तलवार हमारे सिर पर न लटकती रहे। लेकिन हाल ही में रेगुलर प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति होने के कारण आइजीयू की 5 से 12 वर्षों से पहले कार्यरत लगभग 50 गेस्ट फैकल्टी को तुरंत प्रभाव से हटाने से सबके जीवन में अंधेरा छा गया है। इसलिए हमारी मांग है कि पहले हम सभी को हमारे वर्तमान विश्वविद्यालय व अन्य विश्वविद्यालय या कॉलेज इत्यादि में हम सब को प्रारंभिक वेतन के साथ समायोजित या हमारी सेवाएं दोबारा बहाल करवाई जाए, ताकि हमें भी सेवा सुरक्षा मिल सकें। क्योंकि रोजगार होगा तो सेवा सुरक्षा मिलेगी हमारा तो रोजगार ही नहीं रहा।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी कहा कि मुझे कुछ समय दे दो, मैं किसी का भी रोजगार नहीं जाने दूंगा। उन्होंने मौके पर ही उच्च अधिकारियों को निर्देश दिए कि छंटनीग्रस्त आइजीयू की गेस्ट फैकल्टी को नियमानुसार जल्द से जल्द जॉइन करवाया जाए और साथ में विश्वविद्यालयों के अनुबंधित असिस्टेंट प्रोफेसरों के रोजगार सुरक्षित करने वाली कमेटी की फाइल पर जल्द से जल्द कार्यवाही करके आगामी कार्यवाही की जाए ताकि भविष्य में और किसी का रोजगार न जा सकें। इस अवसर पर हुकटा के अध्यक्ष विजय मलिक एवं लीगल सलाहकार और आइजीयू से सन्दीप यादव व ईशान सैनी, सुनीता नागपाल, निशा यादव, पूजा यादव, मीनाक्षी यादव, मनीष मखीजा, प्रवीण कुमार, अजय यादव, देवेश अग्रवाल ,कुरुक्षेत्र से अश्वनी, संजीव आदि उपस्थित रहे।