संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिले के गांव बीकानेर में पिछले दो साल से अवैध रूप से संचालित पैथ लैब पर मंगलवार देर शाम सीएम फ्लाइंग की टीम ने छापा मारकर उपकरण कब्जे में ले लिये और आरोपी लैब संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। सीएम फ्लाइंग की इस कार्रवाई से जिले में अवैध रूप से संचालित लैब संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है। गांव में बिना किसी रजिस्ट्रेशन व डॉक्टर के पैथ लैब चलाई जा रही थी। कार्रवाई में स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर भी शामिल रहे। पैथ लैब से टीम ने बड़ी मात्रा में एलोपैथी की दवा भी बरामद की है। सदर थाना पुलिस ने लैब संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
सीएम फ्लाइंग को सूचना मिली कि गांव बीकानेर में पिछले दो साल से बिना किसी पंजीकरण के अवैध रूप से पैथ लैब चलाई जा रही है। मंगलवार की शाम सीएम फ्लाइंग की टीम एएसआई सचिन कुमार की अगुवाई में लैब पर पहुंची। टीम में स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. विशाल राव और प्रदूषण विभाग के एसडीई हरीश कुमार व जिला नगर योजनाकार विभाग के कनिष्ठ अभियंता हेमंत यादव व दमकल विभाग के संजय कुमार शामिल शामिल रहे। लैब पर टीम को प्रदीप कुमार नाम का व्यक्ति मिला। प्रदीप द्वारा ही लैब का संचालन किया जा रहा था। सीएम फ्लाइंग की टीम ने प्रदीप से लैब चलाने संबंधी लाइसेंस मांगा, लेकिन वह कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाया।
लैब से टेस्ट रिपोर्ट भी बरामद, नहीं मिले किसी डॉक्टर के हस्ताक्षर
जांच में पता लगा कि संचालक द्वारा लैब खोलने के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी। दमकल विभाग, प्रदूषण विभाग व जिला नगर योजनाकार विभाग से भी कोई एनओसी जारी नहीं थी। सीएम फ्लाइंग ने लैब से लोगों की टेस्ट रिपोर्ट भी बरामद की है। इन रिपोर्ट पर किसी भी डॉक्टर के हस्ताक्षर नहीं मिले। लैब संचालक द्वारा स्वयं ही रिपोर्ट तैयार कर लोगों को दी जा रही थी। पुलिस ने लैब से दवाइयां व मशीन भी बरामद की है। दवाइयों के सैंपल भी जांच के लिए भरे गए है। सदर थाना पुलिस ने लैब संचालक जिला झज्जर के गांव अहरी निवासी प्रदीप कुमार के खिलाफ इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
जिले में 150 से अधिक लैब अवैैध रूप से संचालित
बता दें कि पैथ लैब के लिए डिप्लोमा होने के साथ ही अलग-अलग विभागों की एनओसी लेना अनिवार्य होता है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग से पंजीकरण बेहद जरूरी है। जिले में महज 80 लैब ऐसी हैं, जिन्होंने विभागों से अनुमति ली है। लेकिन अनुमान के मुताबिक जिले में 150 से अधिक लैब बिना विभाग की अनुमति के संचालित की जा रही है। यहां ताज्जुब की बात तो यह है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लंबे समय से आंख मूंदे हुए बैठे हैं। लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे लैब संचालकों की जांच के प्रति स्वास्थ्य विभाग अनजान बना हुआ है। जबकि स्वास्थ्य विभाग को अवैध रूप से संचालित लैब के बारे में जानकारी है। शर्मनाक बात तो यह है कि जिले में पहली बार किसी लैब पर कार्रवाई की गई है। ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसी तरह से जिले में लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
यह है नियम
पैथोलॉजी लैब खोलने के लिए पैथोलॉजिस्ट होना आवश्यक है। सहयोगी के तौर पर लैब टेक्नीशियन साथ रहेगा। लेकिन रिपोर्ट पर साइन करने का अधिकार सिर्फ पैथोलॉजिस्ट को होता है। इसके अलावा एमबीबीएस डाक्टर को अपने क्लीनिक पर आने वाले मरीजों की जांच के लिए पैथोलॉजी खोलने का अधिकार है। लेकिन वह सिर्फ अपने ही मरीजों के सैंपल की जांच कर सकता है। लेकिन जिले में लैब टेक्नीशियन के भरोसे पैथोलॉजी लैब चल रही है।
न चेकिंग अभियान चलाया जाता, न ही होती है कार्रवाई
जिले में अवैध पैथोलॉजी लैब का कारोबार जोरों पर चल रहा है। डॉक्टरों के निजी क्लीनिक पर आने वाले मरीजों की जांच और जिले से बाहर विभिन्न कंपनियों की बड़ी पैथ लैब को सैंपल भेजने के लिए खोले गए कलेक्शन सेंटरों के नाम पर पैथोलॉजी लैब चल रही है। इन लैब में बिना पैथोलॉजिस्ट के मरीजों के गंभीर रोगों का डायग्नोस किया जा रहा है, जिससे मरीजों की जान पर संकट मंडरा रहा है। लेकिन स्वास्थ्य महकमा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
वर्जन
मंगलवार को लैब संचालक के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जिन पैथोलॉजी को बिना योग्यताधारक पैथोलॉजिस्ट के चलाया जा रहा है, उनको चिह्नित कर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
- डॉ. विशाल राव, नोडल अधिकारी