बुधवार दोपहर के समय सांड़ों की लड़ाई या फिर जिम्मेदारों की अनदेखी ने दो बच्चों के सिर से पिता का साया छीन लिया। रोते-बिलखते बच्चे प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं कि उनके पिता की मौत का जिम्मेदार कौन है। पिता ने इस बार अपने फोटो स्टूडियो के बाहर लड्डू गोपाल की ड्रेस की स्टॉल भी लगाई हुई थी। शाम के समय पिता बच्चों को मंदिर भी ले जाने वाले थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका और शहर के मेहरवाड़ा निवासी कायस्थवाड़ा चौक पर डोली फोटो स्टूडियो संचालक 42 वर्षीय संजय की सांड़ों के कुचलने से मौत हो गई।
शहर की सड़कों व गली-मोहल्लों में घूम रहे बेसहरा गोवंश लोगों की जान पर भारी पड़ने लगे हैं। पिछले एक सप्ताह के दौरान गोवंश ने एक मासूम सहित दो लोगों को बुरी तरह से कुचल दिया, जिससे एक फोटो स्टूडियो संचालक की मौत हो गई है। यह घटना बुधवार को शहर के कायस्थवाड़ा चौक पर हुई, जहां लड़ाई कर रहे दो सांड़ों ने स्कूटी पर सवार होकर जा रहे एक फोटो स्टूडियो संचालक बुरी तरह से रौंद दिया, जिससे उसका सिर फट गया। आसपास के लोगों ने उसेे ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद लोगों में रोष पनप गया। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है। बता दें कि 6 जुलाई को भी बेसहारा गोवंश ने एक सात वर्षीय मासूम को बुरी तरह से जख्मी कर दिया था। आसपास के लोगों ने उसे नहीं बचाया होता तो संभवतया बड़ी घटना हो सकती थी।
खाना खाने के लिए घर जा रहा था संजय
बताया जा रहा है कि संजय दोपहर का खाना खाने के लिए स्कूटी पर सवार होकर घर जा रहा था। वह स्कूटी को स्टार्ट कर घर जाने के लिए निकला ही था कि रोड पर लड़ रहे दो सांड़ लड़ते-लड़ते उसकी स्कूटी व उसको कुचलते हुए आगे निकल गए। पुलिस के अनुसार शहर के मोहल्ला कायस्थवाड़ा चौक पर बुधवार को दोपहर बाद करीब साढ़े तीन बजे दो सांड़ आपस में लड़ रहे थे। इसी दौरान वहीं चौक पर फोटो स्टूडियो का दुकान चलाने वाले मेहरवाड़ा निवासी संजय कुमार उर्फ डोली स्कूटी लेकर जा रहा था। दोनों सांड लड़ाई करते-करते स्कूटी सवार संजय की तरफ दौड़े। हालांकि संजय ने स्वयं को बचाने का प्रयास भी किया, लेकिन सांड़ स्कूटी सवार संजय को रौंदते हुए निकल गए। सांडों के कुचलने के बाद मौके पर ही संजय का सिर फट गया, जिससे वह रोड पर तड़फने लगा। घटना के तुरंत बाद आसपास के लोगों ने घायल संजय को ट्रामा सेंटर पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
नगर परिषद के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग
घटना के बाद से शहर के लोगों में रोष पनप लगा है। घटना की जानकारी मिलते ही लोगों एक-एक कर नागरिक अस्पताल में जुटने शुरू हो गए। वहीं सूचना मिलते ही पुलिस के अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। लोगों का कहना था कि इस पूरी घटना की जिम्मेदार नगर परिषद के अधिकारी है। शहर को बेसहारा कैटल फ्री शहर घोषित किया हुआ है। उसके बाद भी शहर की सड़कों पर अनगिनत बेसहारा गोवंश घूम रहे है। नप अधिकारी बेसहारा गोवंश को गोशालाओं या बाड़ा में पहुंचा देता तो संभवतया यह घटना न होती। ऐसे में पुलिस को नप अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करना चाहिए।
कॉलोनियों में मासूमों को शिकार बना रहा बेसहारा गोवंश
कैटल फ्री शहर की अगर हकीकत देखनी है तो सड़कों पर नजर दौड़ाने की जरूरत है। जहां देखेंगे वहीं बेसहारा पशु घूमते नजर आएंगे। सच में कैटल फ्री इस शहर की हकीकत बड़ी डरावनी है। सैकड़ों की संख्या में मौजूद पशुओं के कारण वाहन लेकर चलना तो दूर पैदल निकलना भी मुश्किल होता जा रहा है। ये पशु बड़ा के साथ ही मासूम बच्चों को भी अपना निशाना बनाने लगे हैं। कइयों को तो अस्पताल तक पहुंचा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद भी कागजों का पेट भरने वाली नगर परिषद व जिला प्रशासन के अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। ऐसा ही एक मामले वीरवार को सामने आया जब एक मासूम बच्ची को एक गाय ने बुरी तरह से जख्मी कर दिया। ऐसे अनेक मामले हैं।
यह तक नहीं पता शहर में कितने बेसहारा गोवंश
शहर के एक जागरूक नागरिक साकेत धींगड़ा की ओर से 18 नवंबर 2019 को आरटीआई के माध्यम से नगर परिषद से पूछा गया था कि शहर में कितने बेसहारा गोवंश घूम रहे हैं। तीन महीने बाद दिए गए जवाब में नप अधिकारियों ने कहा था कि उनके पास बेसहारा पशुओं का आंकड़ा नहीं है। ऐसे में सवाल है कि जब जिम्मेदारों को आंकड़ा तक नहीं पता तो शहर से बेसहारा गोवंश को कैसे हटाया जाएगा।
नप ने बजट को लेकर भी खड़े किए थे हाथ
हालात इतने बद्तर हैं कि जनता की टैक्स का पैसा लोगों की बजाय मनमाने तरीके से बहाया जा रहा है। नप अधिकारियों ने एक जवाब में कहा था कि उनके पास बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए अलग से बजट नहीं है। गोवंश को पकड़कर कहां रखा जाएगा इसकी भी नप के पास कोई व्यवस्था नहीं है। एक अस्थाई बाड़े की बात जरूर की जा रही है, लेकिन गोशाला एक भी नही है।
तीन साल के दौरान 1106 पशु पकड़ने का दावा
नगर परिषद रेवाड़ी हमेशा से ही विवादों में रही है। बेसहारा गोवंश को लेकर भी हालात ऐसे ही हैं। वर्ष 2016 से लेकर वर्ष 2019 तक 1106 पशुओं को पकड़कर बाहर भेजा गया। लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि शहर में हजारों की संख्या में बेसहारा पशु घूम रहे हैं।