रेवाड़ी। शहर में 28 अप्रैल को वीरवार का दिन सीजन का सबसे गर्म दिन रहा। सर्वाधिक गर्मी की वजह से आमजन ही नहीं, पशु-पक्षी भी परेशान दिखाई दिए। ऐसी स्थिति में दिन में तापमान रिकॉर्ड 44.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
कृषि और मौसम वैज्ञानिकों की माने तो मार्च के अंत से ही तापमान बढ़ने से पछेती फसलों पर विपरीत असर पड़ा। गेहूं और सरसों की फसलों की पैदावार कम रही। रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं और सरसों के दाने सिकुड़ गए। इस वजह से दाने का वजन, स्वाद और गुणवत्ता में बड़ा अंतर आया। चूंकि इस समय खेतों में फसल नहीं है और जमीन खाली है। पशुओं के लिए बोए गए हरे चारे की फसल को भी बढ़ते तापमान की वजह से अधिक सिंचाई की जरूरत है, जिससे जल की खपत अधिक होगी। इसके साथ ही पॉली हाउस में बागवानी की खेती करने वाले किसानों की उपज भी बढ़ते तापमान की वजह से प्रभावित होने की आशंका है।
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कृषि वैज्ञानिकों का मत
रबी फसल की कटाई हो चुकी है मगर जमीन से अगली फसल लेने के लिए किसान को अभी से तैयारी करनी होगी। ढेंचा की बुआई को हरियाणा सरकार इस वजह से प्रोत्साहन दे रही है कि जमीन की उर्वरा शक्ति बनी रहे। पशुओं के लिए हरे चारे की समस्या गर्मी के दिनों में अधिक आ जाती है, ऐसे में हरे चारे की बुआई के पीछे जमीन की उर्वरा शक्ति को सिंचाई करके बरकरार रखना भी एक अहम उद्देश्य होता है। चूंकि गत वर्ष मई में तापमान 45 डिग्री पहुंचा था मगर इस बार यह अप्रैल में ही पहुंच गया है, जो अच्छा संकेत नहीं।
- डॉ. कपूर सिंह, कृषि एवं बागवानी एवं मौसम विशेषज्ञ
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दूध का उत्पादन घटेगा
पशुपालन विभाग के जुड़े अधिकारियों की माने तो गर्मी के लगातार बढ़ने से दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन की क्षमता प्रभावित होगी। गर्मी अधिक होने पर पशुओं का दूध घटने लगता है। ऐसे में किसानों को यही सलाह दी जाती है कि वे अपने पशुओं को ठंडी जगह पर रखें। उनको दिन में कई बार पानी पिलाएं। जोहड़ या साधारण पानी से उनको कम से कम दो-तीन बार नहलाएं। उनको छायादार जगहों पर रखें। धूप में निकाल बाहर चरने के लिए नहीं भेजें। ऐसा करने से पशुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है और गर्भावस्था वाले पशुओं में बच्चा गिरने की नौबत भी आ सकती है।
- डॉ. राजबीर, एसडीओ, पशुपालन विभाग
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बढ़ता तापमान करेगा बीमार
आयुर्विज्ञान से जुड़े चिकित्सकों की माने तो बढ़ता तापमान आम आदमी को बीमार कर सकता है। इन्होंने लोगों को यह सलाह दी है कि वे धूप पड़ने पर अपने घर से बाहर निकलने से परहेज करें। बाहर का अधिक तेलीय भोजन, फास्ट फूड खाने के बजाय घर का खाना लें। खाने में सलाद में ककड़ी, खीरा, टमाटर लें। बाहर से घर के अंदर आते ही किसी भी प्रकार का शीतल पेय नहीं पीएं, क्योंकि यह आपको बीमार कर सकता है। आप अपने शरीर में पानी की मात्रा लगातार बनाए रखने के लिए यात्रा के दौरान सिर पर कपड़ा और मुंह ढांपकर घर से बाहर जाएं। दोपहिया वाहन चलाते वक्त भी गर्म हवाओं से खुद को और चेहरे को बचाने के लिए हरसंभव कोशिश करें। इनके साथ ही शरीर में पानी की कमी या फिर रक्तचाप कम या अधिक होने पर व्यक्ति को खुले में मुंह से सांस दें और बेहोशी की अवस्था में लेटे हुए व्यक्ति को पानी न पिलाएं। ऐसा करने से व्यक्ति की सांस की नालिका में पानी जा सकता है और उसकी मौत हो सकती है।
- डॉ. सचिन भारद्वाज, फिजिशियन
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पिछले 11 वर्ष का तापमान
वर्ष--दिनांक--अधिकतम न्यूनतम
2011--28 अप्रैल--40.5 22.0
2012--28 अप्रैल--37.5 17.5
2013--28 अप्रैल--39.0 21.0
2014--28 अप्रैल--41.0 19.5
2015--28 अप्रैल--37.5 22.4
2016--28 अप्रैल--41.5 19.2
2017--28 अप्रैल--39.5 21.5
2018--28 अप्रैल--41.0 28.0
2019--28 अप्रैल--41.4 15.2
2020--28 अप्रैल--35.0 20.05
2021--28 अप्रैल--42.8 22.0