नगर परिषद में पिछले काफी दिनों से पार्षदों, चेयरमैन और अफसरों के बीच चल रहा विवाद आज केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत की अदालत में पहुंच गया। इसके लिए मंत्री को विशेष तौर पर दिल्ली से अपने रेवाड़ी स्थित आवास पर आना पड़ा। रामपुरा स्थित आवास पर राव की अदालत में नाराज पार्षदों ने चेयरमैन और उनके चहेते अफसरों पर आरोपों की झड़ी लगाई। राव ने नाराज पार्षदों और चेयरमैन तथा अफसरों के बीच छिड़ी जंग को खत्म करने की भरसक कोशिश की लेकिन, नाराज पार्षदों उनसे मिलकर जब बाहर निकले तो संतुष्ट नहीं दिखे।
बाहर आने के बाद उन्होंने कहा, उनकी जो भी शिकायतें थी उससे केंद्रीय मंत्री को अवगत करा दिया गया है। मंत्री ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना भी है लेकिन पार्षदों के रुख को देखते हुए ऐसा लग रहा था कि यदि उनके मनमाफिक नगर परिषद व उनके वार्डों में काम न हुआ तो फिर वे एकजुट होकर बगावत भी कर सकते हैं।
चूंकि, मीडिया को अंदर जाने की अनुमति नहीं थी लेकिन सूत्रों पर भरोसा करें तो मंत्री ने नाराज पार्षदों को मनाने की भरसक कोशिश की है। अपने आवास पर वह सामूहिक रूप से पार्षदों, अफसरों व चेयरपर्सन से नहीं मिले। वह खुद एक कमरे में अपनी बेटी व भाजपा कार्यकारिणी की सदस्य शूटर आरती राव, पीए के साथ मौजूद थे और एक-एक पार्षद को बारी-बारी से बुलाकर बात करते रहे और उनकी बातों को नोट भी किया। खास यह है कि राव खुद हर पार्षद का नाम व वार्ड संख्या नोट कर उसकी बातों को उसके सम्मुख नोट करते रहे। राव ने अपनी अदालत में नगर परिषद के अधिकारियों व चेयरपर्सन पूनम यादव को भी बुला रखा था। नाराज पार्षदों को वरीयता देते हुए राव ने सबसे पहले उनकी बातों को सुना। उसके बाद चेयरपर्सन समर्थित पार्षदों फिर चेयरपर्सन और अफसरों की बातों को सुना और उन्हें आवश्यक निर्देश भी दिये।
नाराज पार्षदों की मानें तो राव ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी बातें न सिर्फ सुनी जाएंगी बल्कि उनकी जो भी समस्या हो या वार्र्डों के कार्य हैं उनको प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। पार्षदों ने कहा, वे अपने निजी काम नगर परिषद से नहीं कराते। जनता ने उन्हें मिनी सदन में भेजा है तो वह जनता के लिए लड़ रहे हैं। हालांकि, उन्होंने अपनी शिकायत राव के समझ दर्ज करा दी है अब देखना है कि वह उनकी बातों को कितनी तव्वजों तज्जबों देते हैं। पार्षदों ने बाहर निकलने के बाद स्पष्ट कहा, देखते हैं केन्द्रीय मंत्री उनकी समस्याओं को किस हद तक दूर कराते हैं। यदि वह इसमें विफल रहे तो अब सीधे बगावत होगा। इसका खामियाजा नगर परिषद की चेयरपर्सन और अफसरों को उठाना पड़ेगा। राव से मिलने वाले पार्षदों में खासतौर पर विजय राव, मनीष गुप्ता, अर्चना, राजेंद्र सिंघल, भूपेंद्र गुप्ता, सज्जन पहलवान, सुरेश, रंजना भारद्वाज, दीलीप माटा, पूनम सतीजा, इतेंद्र पाल, संगीत लता, सुचित्रा चांदना, सतेंद्र यादव व दीपक अग्रवाल शामिल रहे।
गेट के बाहर लगी थी कारों की लाइन:
राव के गेट के बाहर सभी पार्षदों की गाड़ियों की लंबी लाइन लगी हुई थी। उनकी गाड़ियों को अंदर जाने की अनुमति नहीं थी। केवल अफसरों की ही गाड़ियां अंदर जा रही थी। इसको लेकर भी पार्षदों में नाराजगी देखने को मिली कि यहां भी उनके साथ दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है।
जिसका नाम सूची में उसी को अंदर जाने की अनुमति
केन्द्रीय मंत्री के गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मियों व उनके निजी कर्मचारियों के हाथ में एक लंबी लिस्ट थी। उसमें उन लोगों के नाम शामिल थे जिनको अंदर जाने की इजाजत थी। यहां तक कि राव से मिलने आए कई भाजपा नेताओं को भी अंदर नहीं जाने दिया गया। यहां तक कि एम्स मामले में गांव माजरा से मिलने आए ग्रामीणों को भी अंदर जाने नहीं दिया गया। वे देर शाम तक उनके गेट के बाहर ही खड़े रहे।
मीडिया को नहीं थी अंदर जाने की इजाजत
केन्द्रीय मंत्री राव जब अंदर पार्षदों, अधिकारियों से मिल रहे थे तब उनके गेट पर मीडिया एकत्र हो गई। लेकिन गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने कहा, मीडिया को अंदर जाने की अनुमति नहीं है।