संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिले में एनीमिया मुक्त अभियान की शुरुआत एक मई 2022 में की गई थी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों में नवजात से लेकर 6 साल तक के बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है। एक साल में कुल 91412 बच्चों के हिमोग्लोबिन टेस्ट से लेकर उनका स्वास्थ्य जांचा गया, जिनमें 10115 बच्चों में 12 ग्राम और 14784 बच्चों में 10 ग्राम खून मिला। इनमें 861 बच्चे तो ऐसे मिले हैं जिनमें 7 ग्राम से भी कम खून था। इसके अलावा 65652 बच्चों में 12 ग्राम से ज्यादा खून मिला।
स्वास्थ्य विभाग की नजर में 7 ग्राम से नीचे खून वाले बच्चों को खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। यह कैटेगरी सीवियर एनीमिया में आती है। यह अभियान टेस्ट, ट्रीट व टॉक पर चलाया जा रहा है। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर जांच कर रही है। जांच के बाद जिन बच्चों में खून की कमी या बीमारी से ग्रस्त मिलते हैं तो उनकी रिपोर्ट नागरिक अस्पताल में भेजी जाएगी।
त्रैमासिक स्तर पर चलाया गया सप्ताह
यह एनीमिया उन्मूलन सप्ताह अगस्त, नवंबर 2022 और फरवरी 2023 के मई में 1 से 7 तक त्रैमासिक रूप में मनाया जा रहा है। लक्षित लाभार्ती 0 से 5 साल के बच्चे, 5 से 9 साल के बच्चे, 10 से 19 साल के किशोर, प्रजन्न आयु वर्ग की महिलाएं, गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली महिलाएं हैं। इसके तहत मलेरिया, होमोग्लोबिनोपैथी फ्लोरोसिस पर विशेष ध्यान देने के साथ स्थानीय क्षेत्रों में एनीमिया के गैर-पोषक कारणों के बारे में जागरूकता, जांच और उपचार को तेज करना है।
एनीमिया के मुख्य लक्षण
डॉक्टरों के मुताबिक लेटने व बैठने के दौरान चक्कर आने, बेहोश होना, सांस फूलना, हृदय गति का तेज होना, कमजोरी एवं बहुत अधिक थकावट होना, जीभ, नाखून व पलकों के नीचे सफेदी आने व चेहरे तथा पैरों पर सूजन दिखाई देने सहित त्वचा का सफेद दिखना आदि एनीमिया के मुख्य लक्षण हैं।
15 दिन बाद दोबारा होगी जांच : डॉ. विजय
डीआईसी केंद्र के नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. विजय प्रकाश ने बताया कि जिन बच्चों में खून की कमी मिलती है। उनकी 15 दिनों तक रिपोर्ट की जाएगी। इन बच्चों को आयरन की सीरप के साथ ही सीवियर एनीमिया वाले वाले बच्चों को खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है तो उनको खून चढ़ाया जाएगा। इसके बाद उनकी दोबारा जांच होगी, जिनमें देखा जाएगा कि उनमें खून बढ़ा है या नहीं।