संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। आदि गुरु शंकराचार्य ने प्राचीन भारतीय उपनिषदों के सिद्धांतों को पुनर्जीवित करने का कार्य किया बल्कि धर्म को लेकर लोगों में फैलाई जा रही भ्रांतियों को भी मिटाया। ये बातें पं. दिलीप तिवाड़ी ने सोलहाराही तालाब के पास स्थित प्राचीन श्याम मंदिर के परिसर में आयोजित संगोष्ठी में कहीं।
संगोष्ठी का शुभारंभ भारत माता एवं आदि गुरु शंकराचार्य की पूजा से हुआ। कलाकार अमन यादव की ओर से बनाई गई पेंटिंग का अनावरण पं. दिलीप तिवाड़ी और डॉ. आरके जांगड़ा ने किया। आर्टिस्ट अमन यादव ने कहा कि शंकराचार्य महान संत थे। पं. दिलीप तिवाड़ी ने कहा आदिगुरू शंकराचार्य हिंदू धर्म में एक विशेष स्थान रखते हैं। शंकराचार्य ने प्राचीन भारतीय उपनिषदों के सिद्धांतों को पुनर्जीवित करने का कार्य किया। आदि शंकराचार्य ने ही हिंदू धर्म की पुनर्स्थापना का कार्य किया है।
प्रो. डॉ. जया शर्मा ने कहा आचार्य शंकर ने अल्पायु में ही न केवल बड़े-बड़े ग्रंथों की रचना की बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष का परिभ्रमण कर धार्मिक दृष्टि से उसे एक सूत्र में बांधने का प्रयास किया। संगोष्ठी में पर्यावरण व जल संरक्षण का संकल्प लिया गया। इस दौरान सिमरन, रानी, रेखा रानी, सुमित्रा देवी गीता, राधिका, अंजलि, अनामिका, ममता, संतोष, सरिता, सुनीता को तुलसी का पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कैलाश चंद्र, जितेंद्र कुमार सतीश यादव, भूपेंद्र सिंह मौजूद रहे।