रेवाड़ी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अंकिता शर्मा की अदालत ने साइबर ठगी के एक मामले में आरोपी अरशद मलिक की दूसरी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित जैन कॉलोनी, खटाखेड़ा मेन रोड का निवासी है।
अभियोजन के अनुसार शिकायतकर्ता प्रीतम कोचर ने बताया कि नवंबर 2025 में फेसबुक पर क्वांटम एआई फंड नामक निवेश योजना का विज्ञापन देखकर उसने कंपनी में पंजीकरण कराया।
खुद को वित्तीय सलाहकार और कंपनी अधिकारी बताने वाले लोगों ने व्हाट्सएप व ईमेल के माध्यम से संपर्क कर निवेश के नाम पर अलग-अलग किस्तों में 10.16 लाख रुपये जमा करवा लिए।
बाद में मुनाफा और मूल राशि निकालने के लिए जीएसटी, सिक्योरिटी चार्ज और अकाउंट वेरिफिकेशन के नाम पर लगातार रकम मांगी गई, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। जांच में सामने आया कि ठगी की राशि में से दो लाख रुपये सीधे अरशद मलिक के खाते में पहुंचे, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया।
बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी 27 मई से न्यायिक हिरासत में है, जांच पूरी हो चुकी है, चालान पेश किया जा चुका है और उसने शिकायतकर्ता को दो लाख रुपये लौटा दिए हैं। शिकायतकर्ता ने भी जमानत पर आपत्ति नहीं जताई। वहीं राज्य पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी लाभार्थी खाता धारक है, अन्य आरोपी अभी गिरफ्तार नहीं हुए हैं और रिहा होने पर जांच व न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
16 जुलाई को अदालत ने कहा कि साइबर अपराध सामान्य वित्तीय विवाद नहीं है। केवल आंशिक राशि लौटाने या समझौता होने से आपराधिक दायित्व समाप्त नहीं हो जाता। मामले में कई राज्यों के बैंक खातों और अनेक लेन-देन की जांच अभी भी महत्वपूर्ण है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी।