रेवाड़ी। हासांका गांव की बेटी 12 साल की आराध्या आज देशभर के बच्चों के लिए प्रेरणा बन गई है। दो साल पहले उसने माउंट एवरेस्ट की 18 हजार फीट ऊंचाई पर स्थित खुम्बू आइस फॉल तक पहुंचकर इतिहास रचा था। इस उपलब्धि के साथ आराध्या भारत की सबसे कम उम्र की पर्वतारोही बन गई थी।
10 सितंबर 2023 को आराध्या अपने अभियान के लिए रवाना हुई थी। आराध्या ने 14 दिन में यह कठिन यात्रा पूरी की थी। बर्फ से ढकी चोटियां, ठंडी हवाएं और खतरनाक रास्ते भी उसकी हिम्मत को गिरा नहीं सके क्योंकि अंदर पर्वतारोहण का जुनून था और अपने लक्ष्य तक पहुंचना था।
आराध्या की सफलता के पीछे उसके शिक्षक यतीश सिंगल और पर्वतारोही नरेंद्र यादव का बड़ा हाथ रहा है। नरेंद्र यादव ने उसे माउंटेनियरिंग की ट्रेनिंग दी और यतीश सिंगल ने हर कदम पर मार्गदर्शन किया।
भविष्य में रखा है यह लक्ष्य
आराध्या अभी सैनिक स्कूल में पढ़ाई कर रही है। पढ़ाई के साथ-साथ वह अपनी अगली यात्राओं की तैयारी भी कर रही है। अब उसका लक्ष्य ऑस्ट्रेलिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुस और दक्षिण अफ्रीका के किलीमंजारो पर्वत पर चढ़ाई करना है। वह चाहती है कि भविष्य में वह सेवन समिट्स यानी सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर भारत का तिरंगा फहराए।
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छोटी सी उम्र में बड़ी उपलब्धि कर सकते हैं हासिल : आराध्या
पूरे अभियान के दौरान आराध्या की मां ने उसका पूरा साथ दिया। मां ने हर वक्त उसे हिम्मत दी और उसका हौसला बढ़ाया। आराध्या कहती हैं कि अगर परिवार और गुरु का साथ हो तो कोई भी मुश्किल आसान हो जाती है। बाल दिवस के मौके पर आराध्या की यह कहानी सभी बच्चों को प्रेरित करती है। यह सिखाती है कि अगर दिल में कुछ करने का जज्बा हो तो उम्र की कोई सीमा नहीं होती। छोटी सी उम्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करने वाली आराध्या ने साबित कर दिया कि मेहनत, लगन और विश्वास से हर सपना पूरा किया जा सकता है।