फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अमरुत योजना के 66 प्रतशित कार्य अधूरे, कई कार्य शुरू भी नहीं हुए

विज्ञापन
शहर के बाईपास पर चल रहा सीवर लाइन डालने का कार्य। संवाद - फोटो : Rewari
विज्ञापन
शहर की दो लाख की आबादी के लिए सीवर-पेयजल की नई लाइन डालने और जर्जर हो चुकी पुरानी लाइनों को बदलने के लिए दो साल पहले अमरुत योजना के तहत शुरू किए गए कार्यों की समय सीमा समाप्त होने वाली है, पर अभी 66 फीसदी काम अधूरे हैं।
विज्ञापन

नगर परिषद की अनदेखी के कारण 31 मार्च को 68.59 लाख रुपये में से 45.46 करोड़ रुपये सरकार के पास जमा करने पड़ेंगे। हालात ये है कि वर्ष 2019 में शुरू हुए 20 कार्यों में से बूस्टिंग स्टेशन जैसे 8 महत्वपूर्ण कार्य शुरू तक नहीं हो सके। वहीं इतने ही कार्य महज दस 10 प्रतिशत हो सके हैं। नप की ओर से 30 जुलाई और 26 सितंबर 2019 को ठेकेदार को धीमी गति से काम करने पर चेतावनी दी गई थी। 6 जनवरी 2021 को भी नप की ओर से ठेकेदार को पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन नप की सक्रियता महज पत्रों तक दिखी। यदि नप अधिकारियों ने ठीक से जिम्मेदारी दिखाई होती तो शायद शहरवासियों को सीवर ओवरफ्लो और पेयजल की समस्या से दो-चार नहीं होना पड़ता। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
जानकारी के लिए मार्च 2019 में इन विकास कार्यों को 18 माह में पूरा करने का टेंडर दिया गया था, लेकिन कोरोना की वजह से इसकी समय सीमा बढ़ाकर 31 मार्च 2021 कर दी गई थी। अमरुत योजना 31 मार्च 2021 को पूरी हो रही है। वर्ष 2016 में प्रपोजल बनने के बाद 2018 में डीपीआर तैयार की गई थी। रेवाड़ी में 2019 में सीवर व पेयजल के लिए 68.59 करोड़ रुपये का टेंडर दे दिया गया था।
विज्ञापन

पेयजल के लिए 33.28 और सीवर के लिए मिले थे 34.72 करोड़ रुपये
अमरुत योजना के तहत शहर की बाहरी कॉलोनियों से लेकर पुराने शहर में सीवर और पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करना था। यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना थी, लेकिन सरकारी सिस्टम की खामी कहें या फिर अधिकारियों की लापरवाही जिसकी वजह से शहर के लोगों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाया है। ऐसे में यदि अमरुत योजना का समय नहीं बढ़ाया गया तो लोगों को सीवर-पानी की समस्या से पहले की तरह ही जूझना पड़ेगा। योजना के तहत पेयजल ढांचे को मजबूत करने के लिए 33.28 करोड़ रुपये मिले थे, जिसमें से अब तक 10.81 करोड़ और सीवर लाइन डालने के लिए मिले 34.72 करोड़ रुपये में से 12.32 करोड़ रुपये के ही कार्य हो पाए हैं। टेंडर के मुताबिक वर्ष 2020 में ही इन कार्यों को पूरा होना था।
शहर में पेयजल और सीवर सबसे बड़ी समस्या
शहर में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह से यमुना के पानी पर निर्भर है। जवाहर लाल कैनाल के माध्यम से शहर तक पानी पहुंचता है। इसके बाद इसको शोधित कर घर-घर तक पहुंचाया जाता है। भंडारण क्षमता की कमी से लेकर कॉलोनी में अंतिम घर तक पानी पहुंचाने के लिए लगाई गई मोटर पुरानी हो चुकी हैं। पुराने शहर में जर्जर पेयजल पाइप लाइन में सीवर का पानी मिल जाता है। शहर के लोगों को हर महीने पानी की समस्या का सामना करना पड़ता है। शहर के 31 वार्ड में से प्रत्येक वार्ड में सीवर ओवरफ्लो की शिकायतें रहती हैं। इससे पड़ी समस्या 40 साल पुरानी जर्जर सीवर लाइन है। इन सभी समस्याओं के समाधान के किए ही अमरुत योजना के तहत मिले करोड़ों रुपये खर्च किए जाने थे। ऐसे में समझा जा सकता है कि फंड होने के बावजूद नप अधिकारी बुनियादी समस्याओं के समाधान के प्रति गंभीर नहीं दिख रहे हैं।
टेंडर के बावजूद ये कार्य नहीं हो सके शुरू
दिल्ली गेट के पास नागरिक अस्पताल में बनने वाला पेयजल वाटर टैंक
दिल्ली गेट पर ही 640 किलो लीटर क्षमता का बूस्टिंग स्टेशन
शहर में 20 पंप बदलने के कार्यों में से एक पर भी काम नहीं हुआ
रेवाड़ी-नांगलमूंदी स्टेशन की रेलवे क्रॉसिंग के लिए 150 एमएम डीआई पाइप
कालाका जलघर पर रोड बनाने के दो कार्य होने थे, एक भी शुरू नहीं हो पाया
133 चैंबर बनाने पर भी आज तक कोई कार्य शुरू नहीं हो पाया
31 मार्च को अमरुत योजना का समय पूरा हो रहा है। कोरोना के चलते ठेकेदार को 6 माह का अतिरिक्त समय दिया गया था, लेकिन 60 प्रतिशत से ज्यादा काम बचा हुआ है। यदि योजना को आगे नहीं बढ़ाया गया तो करीब 45 करोड़ रुपये की राशि लौटानी पड़ेेगी। ठेकेदार को 10 प्रतिशत का जुर्माना लगाने के लिए नोटिस दिया गया है। अधिकारियों की लापरवाही के सवाल पर कहा कि कुछ दिन पहले ही रेवाड़ी नगर परिषद में बतौर एक्सईएन ज्वाइन किया है। पहले क्या हुआ है कुछ नहीं कह सकता।
विज्ञापन

हेमंत यादव, एक्सईएन, नगर परिषद, रेवाड़ी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें