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Rewari News: प्रदूषण का दंश झेल रहे मसानी बैराज में छोड़े मछली के 5 लाख बीज

Tue, 12 Aug 2025 12:57 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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फोटो : 1मसानी बैराज का दृश्य। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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रेवाड़ी। पहले से ही प्रदूषण का दंश झेल रहे मसानी बैराज के पानी में मत्स्य विभाग ने रैंचिंग कार्यक्रम के तहत मछली के 5 लाख बीज छोड़े हैं। इस बैराज में वर्तमान में भी एसटीपी का पानी छोड़ा जा रहा है। दूषित पानी के चलते ही जुलाई 2024 में इस बैराज में हजारों मछलियों की मौत हो गई थी। ऐसे में छोड़े गए मछलियों के बीज की सुरक्षा पर संकट पैदा होने की आशंका जताई जा रही है।
मत्स्य विभाग की ओर से मछली संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए रैंचिंग कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत जलाशयों में मछली के बीज छोड़े जा रहे हैं। मसानी बैराज का पानी दूषित होने के कारण इसमें मछली के बीज छोड़ने पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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हालांकि मत्स्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी बारिश का सीजन चल रहा है। ऐसे में दूषित पानी काफी हद तक कम हो गया है। इस वजह से यहां पर मछली के बीज छोड़े गए हैं। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि पिछली बार जब मछलियां मरीं थी, तब हो सकता है कि केमिकल युक्त पानी यहां पर आ गया हो। मछली बीज डालने को लेकर आदेश ऊपर से आया था।
मसानी बैराज के दूषित पानी को लेकर आसपास गांवों के लोग लंबे समय से परेशान हैं। ग्रामीणों ने दूषित पानी के चलते बीमारियां फैलने की आशंका जताते हुए आंदोलन करने की चेतावनी दी थी। ग्रामीणों ने दूषित पानी को साफ कराने की मांग भी प्रशासन से की थी।
एनजीटी में चल रहा है मामला : मसानी बैराज में दूषित पानी छोड़ने को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में सुनवाई चल रही है। इसमें जिले के विभिन्न सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स और औद्योगिक इकाइयों से छोड़े जाने वाले अपशिष्ट जल की जांच व नियंत्रण को लेकर कार्यवाही जारी है। मामले की अंतिम सुनवाई होनी बाकी है। एसटीपी प्लांटों पर जुर्माना भी किया जा चुका है।


मछलियों को विकसित होने में लगेगा 7-8 माह का समय

मसानी बैराज में छोड़े गए मछली के 5 लाख बीजों को मछली के रूप में विकसित होने में 7 से 8 महीने का समय लगेगा। ये बीज हरियाणा में अधिकतर पाली जाने वाली मछलियों की प्रजाति इंडियन मेजर कार्प के हैं। अब बारिश का सीजन भी खत्म होने वाला है और एसटीपी का पानी लगातार यहां पर आ रहा है। बारिश खत्म होने के बाद फिर बैराज का पानी प्रदूषित हो जाएगा। प्रदूषित पानी की निकासी का कोई प्रबंध नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले से ही जब पानी दूषित है तो इसमें मछलियों को छोड़कर केवल उनके प्राण मुसीबत में डाले गए हैं।

प्रोजेक्ट पूरा होने में लगेगा 3 वर्ष का समय
सिंचाई विभाग ने 218 करोड़ रुपये की एक विस्तृत योजना तैयार की है। इस योजना में पांच बड़े टैंक बनाए जाएंगे। दो सौ एकड़ में एक बड़े टैंक निर्मित होंगे। 23 किलोमीटर की पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इस पाइपलाइन से पानी को पटौदी के पास इंदौरी नदी तक पहुंचाया जाएगा। योजना को पूरा करने में लगभग तीन वर्ष का समय लगेगा। प्रोजेक्ट की रूपरेखा तैयार करने के लिए सलाहकार की नियुक्ति का कार्य चल रहा है।


वर्जन

मसानी बैराज में मछली के बीज डालने के समय मैं यहां नहीं थी। जिला मत्स्य अधिकारी का चार्ज किसी ओर को दिया गया था। हालांकि, यह बीज रैंचिंग कार्यक्रम के तहत बैराज में डाले गए थे।-आशा हुड्डा, जिला मत्स्य अधिकारी रेवाड़ी।
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मसानी बैराज में सरकार के रैंचिंग कार्यक्रम के तहत 5 लाख मछली के बीज डाले गए हैं। जहां तक पानी दूषित होने का सवाल है तो अभी बारिश का सीजन है। बारिश के पानी से काफी हद तक दूषित पानी कम हो गया होगा। ऐसे में यहां मछलियां डाली जा सकती हैं।-सतवीर यादव, मत्स्य अधिकारी
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