योग से लेकर कुश्ती और कबड्डी जैसे खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने जिले के तीन खंड की 30 पंचायतों में व्यायामशालाओं के निर्माण की घोषणा वर्ष 2015 में की थी। वर्ष 2016 में 6 करोड़ रुपये का बजट पास कर टेंडर जारी कर निर्माण कार्य शुुरू भी कर दिया गया। लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी तीन करोड़ रुपये की दूसरी किस्त जारी ने होने के कारण निर्माण कार्य अटका हुआ है। ऐसे में समझा जा सकता है कि ग्रामीण युवाओं को आगे बढ़ाने में जिम्मेदार कितने संवदेनशील हैं।
बता दें कि सीएम मनोहर लाल ने अपने दौरे के दौरान मई 2015 में जिले की तीनों विधानसभाओं में 10-10 व्यायामशालाओं के निर्माण की घोषणा की थी। हालांकि इस योजना को पूरे प्रदेश में ही लागू किया गया था। गांवों में व्यायामशालाओं के निर्माण के लिए पंचायतों की ओर दो-दो एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई थी। निर्माण पंचायती विभाग को ही कराना था।
एक व्यायामशाला के लिए 29 लाख रुपये किए गए थे निर्धारित
एक व्यायामशाला के निर्माण के लिए 29 लाख रुपये निर्धारित किए गए थे। ऐसे मे कुल बजट करीब 9 करोड़ रुपये निर्धारित हुआ था। सरकार की ओर से वर्ष 2016 में 6 करोड़ रुपये की पहली किश्त जारी की गई थी। अधिकतर गांवों में व्यायामशालाओं को निर्माण कार्य शुरू भी हो गया था। लेकिन दूसरी किश्त के अभाव में निर्माण अटकने से पहले किया गया कार्य भी बदहाल होता जा रहा है।
योग के साथ स्थानीय खेलों को बढ़ावा देना था मकसद
गांवों में व्यायामशालाएं खोलने का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को योग के अलावा कुश्ती व कबड्डी आदि के माध्यम से फिट रखने का था। इसके अलावा बच्चों में खेल भावना बचपन से ही आ सके, इसके लिए एक माहौल तैयार करना था। उम्मीद की गई थी कि व्यायामशालाएं खुलने से स्टेट, नेशनल व इंटरनेशनल स्तर पर हरियाणा के खिलाड़ी पहले के मुकाबले ज्यादा से ज्यादा मेडल ला सकेंगे।
इन गांवों में खोली जानी थी व्यायामशालाएं
खंड रेवाड़ी : कापड़ीवास, काकोड़िया, लिसाना, गिंदोखर, माजरा गुरदास, खिजूरी, खरखड़ा और ततारपुर इस्तमुरार।
खंड खोल : कुंडल, बुड़ौली, धवाना, अहरोद, ऊंचा, भटेड़ा, खोरी और प्राणपुरा।
खंड बावल : झाबुआ, नांगल तेजू, खंडोड़ा, सुलखा, राजगढ़, आनंदपुर, अलावलपुर, बोलनी, मोहम्मदपुर, भूड़ला, ड्योढई, बालावास, हरचंदपुर, टांकड़ी और कसौली।
कई बार भेजा जा चुका है रिमाइंडर : एक्सईएन
एक्सईएन पंचायती राज पेशन कुमार ने बताया कि दूसरी किस्त के लिए विभाग को कई बार रिमाइंडर भेजा जा चुका है। जैसे ही दूसरी किस्त मिलेगी, निर्माण कार्य पूरा करा दिया जाएगा।