फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

10 माह में 145 सैंपल, 20 खाने लायक नहीं, देशी घी जांच में नहीं

विज्ञापन
विज्ञापन
रेवाड़ी। जनवरी से लेकर अक्तूबर तक तक खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से कुल 145 सैंपल लिए गए, जांच रिपोर्ट में खोया, पनीर, दही सहित 20 खाद्य पदार्थ खाने लायक नहीं मिले। वहीं अकेले अक्तूबर माह में सीएम फ्लाइंग व खाद्य सुरक्षा टीम ने 57 सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए, इनमें से घी के पांच सैंपल की रिपोर्ट आ चुकी है। इनमें से घी के तीन सैंपल भी मानकों पर खरा नहीं उतर पाए। ऐसे में सवाल है कि आखिर जुर्माना से लेकर सजा का प्रावधान होने के बाद भी मिलावटखोरों में डर क्यों नहीं है। अमर उजाल ने पड़ताल की तो पाया गया कि बीते 10 माह के दौरान सैंपलिंग भी हुई और रिपोर्ट भी आई, लेकिन एक भी मामले में जिम्मेदारों की ओर से कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में ढीली कार्रवाई के कारण ही मिलावट के धंधे में लगे लोग स्वास्थ्य के साथ बिना डरे खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे में यदि सैंपलिंग बढ़ाकर कार्रवाई की जाए तो कुछ अंकुश जरूर लग सकता है।
विज्ञापन

जांच रिपोर्ट आने से पहले बेच चुके होते हैं माल
प्रत्येक वर्ष खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर सैंपलिंग का अभियान चलाया जाता है, लेकिन जब तक जांच रिपोर्ट आती है खाद्य पदार्थ बिक चुके होते हैं। अधिकारियों का तर्क है कि रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई भी की जाती है, लेकिन सवाल है कि यदि असुरक्षित खाद्य पदार्थ खाने से कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार या मौत हो जाए तो जिम्मेदार कौन होगा। क्योंकि जिस तरह से गोदामों में मिठाइयों के जखीरे मिल रहे हैं, उससे एफएसएसएआई की मिठाइयों के एक्सपायरी की गाइडलाइन भी कहीं टिकती नजर नहीं आती हैं।
एफएसएआई की गाइडलाइन के तहत कार्रवाई की जाती है। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से लगातार खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कार्रवाई की जा रही है। कुछ स्थानों पर माल खराब दिखने पर नष्ट भी कराया जा चुका है। हमारी ओर से सितंबर तक सैंपल रिपोर्ट कार्रवाई के लिए भेजी जा चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

डॉ. सचिन शर्मा, खाद्य सुरक्षा अधिकारी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें