एक तरफ अशोक गहलोत और सचिन पायलट, दोनों ही खेमे अपनी जीत की आस लगाए बैठे हैं। दूसरी ओर ये दोनों नेता विभिन्न जांच एजेंसियों के कंधों से बंदूक चला रहे हैं। गहलोत सरकार को अस्थिर करने के मामले की जांच के लिए विशेष सहयोग समूह (एसओजी) बनाया गया है। इस समूह के सदस्य गुरुग्राम के उस होटल के बाहर तक पहुंचे थे, जहां पर राजस्थान के विधायक ठहरे हुए थे।
सूत्रों का कहना है कि राजस्थान पुलिस ने गुरुग्राम प्रशासन को विधायकों के केस को लेकर सारी जानकारी दी थी। इसके बाद भी उन्हें होटल में प्रवेश नहीं करने दिया गया। विधायकों की खरीद-फरोख्त से जुड़ा ऑडियो वायरल होने के बाद इस मामले में पूछताछ करने के लिए एसओजी की पांच सदस्यीय टीम गुरुग्राम पहुंची थी।
गुरुग्राम में तैनात हरियाणा पुलिस के एक अधिकारी ने नाम का खुलासा न करने की शर्त पर बताया कि इस मामले में जब तक सरकार की हरी झंडी नहीं मिलती, तब तक हरियाणा पुलिस एक अक्षर भी नहीं बताएगी। इतना तय है कि राजस्थान के विधायकों की वीडियो फुटेज हरियाणा पुलिस के पास है।
उनसे मिलने कौन आया था और वे यहां से किस जगह पर गए, यह सब जानकारी है। राजस्थान पुलिस के डीजीपी भूपेंद्र यादव ने अब जांच में सहयोग की अपील की है, वह महज एक प्रोटोकॉल से ज्यादा कुछ नहीं है।
राजस्थान में दोनों खेमे अपना प्रभाव दिखाते हुए जांच एजेंसियों की भरपूर मदद ले रहे हैं। मुख्यमंत्री गहलोत एसओजी और सीआईडी महकमे को आगे रखकर केस की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं तो वहीं दूसरा खेमा केंद्रीय एजेंसियों के सहारे बैठा है। आयकर विभाग की टीमें गहलोत के करीबियों पर छापा मार चुकी हैं, जबकि ईडी की टीम भी अब मैदान में आ गई है।
बुधवार को ईडी ने अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन के आवास एवं दूसरी जगहों पर छापेमारी की है। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी राजस्थान की चुनी हुई सरकार को गिराने का षड़यंत्र कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि 13 जुलाई को इनकम टैक्स और ईडी के छापे डलवाए गए। कांग्रेस नेता राजीव अरोड़ा, धर्मेंद्र राठौड़ और फेयरमोंट होटल के मालिक रत्न शर्मा को धमकाने, दबाने और कुचलने का प्रयास किया गया।