फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पंजाब-हरियाणा जल विवाद: सांसद मालविंदर सिंह कंग ने बिट्टू को लताड़ा, केंद्र पर साजिश का आरोप; रवनीत सिंह बोले

Wed, 30 Apr 2025 01:45 PM IST
नवीन दलाल अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़

सार

पंजाब और हरियाणा के बीच जल विवाद ने अब सियासी रंग ले लिया है। पंजाब सरकार ने स्पष्ट किया कि जब तक वह सत्ता में है, पंजाब के हक कोई नहीं छीन सकता। दूसरी ओर, हरियाणा में बीजेपी नेताओं और विपक्षी दलों ने पंजाब के फैसले को हरियाणा के हितों पर हमला करार दिया है।
विज्ञापन
भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पंजाब और हरियाणा के बीच भाखड़ा नहर के पानी को लेकर चल रहा विवाद और गहरा गया है। आम आदमी पार्टी के सांसद मालविंदर सिंह कंग ने केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता रवनीत सिंह बिट्टू को आड़े हाथों लेते हुए केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार पर पंजाब के हितों के खिलाफ साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है। कंग ने कहा कि पंजाब ने हरियाणा को उसका पूरा हक का पानी दे दिया है, लेकिन अब पंजाब में पानी की कमी के चलते अतिरिक्त पानी देना संभव नहीं है।

विज्ञापन


वहीं, रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि जब पूरा देश पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ एकजुट है, तब सीएम भगवंत मान पानी के मुद्दे पर राज्यों को बांटने का विकल्प चुन रहे हैं। पंजाब के पानी की एक भी बूंद नहीं दी जाएगी, लेकिन यह राजनीतिक दिखावा करने का समय नहीं है।

हरियाणा की मांग और पंजाब का सख्त रुख
हरियाणा ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के जरिए पंजाब से 8500 क्यूसेक पानी की मांग की है। जवाब में पंजाब सरकार ने साफ कर दिया कि वह पहले ही मानवीय आधार पर 4000 क्यूसेक पानी दे रही है, जबकि हरियाणा ने अपने कोटे से 103% पानी का उपयोग कर लिया है। दूसरी ओर, पंजाब को केवल 89% पानी मिला, जो सभी राज्यों में सबसे कम हिस्सेदारी है। सांसद कंग ने कहा कि पंजाब के बांधों में जलस्तर सामान्य से नीचे है, और खरीफ सीजन के लिए पानी की भारी जरूरत है। ऐसे में 8500 क्यूसेक पानी देना तकनीकी रूप से भी असंभव है, क्योंकि भाखड़ा मेन लाइन नहर की कुल क्षमता सिर्फ 10,000 क्यूसेक है।
विज्ञापन


केंद्र और बीजेपी पर साजिश का आरोप
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और सांसद कंग ने केंद्र की बीजेपी सरकार पर बीबीएमबी के जरिए पंजाब की नुमाइंदगी खत्म करने और हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया। कंग ने बिट्टू को निशाने पर लेते हुए कहा, "आपको पंजाब के हकों से ज्यादा अपनी कुर्सी की चिंता है। केंद्र की बीजेपी सरकार को नसीहत दें कि वह पंजाब के साथ अन्याय बंद करे। हरियाणा के मुख्यमंत्री को सलाह दें कि वह पानी का सही उपयोग करें।" 

पंजाब की मांग: वैज्ञानिक और न्यायसंगत जल बंटवारा
पंजाब सरकार ने पानी को अपनी जीवनरेखा बताते हुए किसी भी कीमत पर अतिरिक्त पानी न देने का ऐलान किया है। सरकार ने बीबीएमबी से वैज्ञानिक और न्यायसंगत जल बंटवारे की मांग की है। कंग ने कहा कि यह पानी की लड़ाई नहीं, बल्कि पंजाब के अधिकारों की रक्षा की जंग है। हरियाणा की मांग राजनीति से प्रेरित लगती है।

हरियाणा का जवाब और गहराता विवाद
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब के रुख पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बीबीएमबी की तकनीकी समिति ने 23 अप्रैल को 8500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्णय लिया था, जिसे लागू करना पंजाब की जिम्मेदारी है। सैनी ने चेतावनी दी कि यदि पानी नहीं मिला तो हरियाणा के पांच जिलों में पेयजल संकट गहरा सकता है।

विज्ञापन

क्या अब पानी भी राजनीतिक स्वार्थों की तराजू पर तौला जाएगा- राज्यसभा सदस्य रेखा शर्मा

हरियाणा को उसके हिस्से के पीने के पानी से वंचित करने का  प्रयास न सिर्फ पंजाब सरकार द्वारा एक संवैधानिक व्यवस्थाओं के खिलाफ है बल्कि यह एक पूर्वनियोजित राजनीतिक दुर्भावना का प्रतीक भी है।क्या अब पानी भी राजनीतिक स्वार्थों की तराजू पर तौला जाएगा? हरियाणा से राज्य सभा सदस्य रेखा शर्मा ने पंजाब पर निशाना साधा है। 

उन्होंने कहा कि आश्चर्य होता है कि जब तक दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार थी, तब तक पंजाब सरकार को वहां भेजे जाने वाले पानी से कोई समस्या नहीं थी। आज जब दिल्ली में उनकी पार्टी सत्ता में नहीं है तो पंजाब के मुख्यमंत्री का सुर बदल गया है। 

हरियाणा ने हमेशा सहयोगात्मक संघवाद की भावना के तहत कार्य किया है, लेकिन पंजाब सरकार की ये हरकतें न केवल उस भावना को ठेस पहुंचा रही हैं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन को संकट में डाल रही हैं। अप्रैल महीने में हरियाणा को सिर्फ 4,000 क्यूसेक पानी मिल पाया है, जो हमारी आवश्यकता का मात्र 60% है। गर्मी के इस चरम समय में ये स्थिति जल संकट को न्योता देने वाली है।

बीबीएमबी की तकनीकी कमेटी द्वारा 23 अप्रैल को किए गए निर्णय को जानबूझकर टाला जाना यह दर्शाता है कि पंजाब के अधिकारी अपने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर हरियाणा और दिल्ली की जनता को जल-संक्रमण और स्वास्थ्य संकट की ओर धकेल रहे हैं।

मैं पंजाब सरकार से पूछना चाहती हूं?
रेखा शर्मा ने कहा कि क्या राजनीति इतनी ऊपर हो गई है कि इंसानियत और सह-अस्तित्व की मूल भावना को कुचल देना अब स्वीकार्य हो गया है?
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें