पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के पीएसओ वीर सिंह को पीटने, अवैध रूप से हिरासत में रखने और 15 हजार रुपये की रिश्वत लेने के कथित मामले में पेंच फंसता जा रहा है। मामले को लेकर जिला पुलिस कप्तान राकेश कुमार ने कहा है कि जांच जारी है। जांच रिपोर्ट के आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद मेनका गांधी की सुरक्षा में पिछले दस वर्षों से थाना हसनपुर के गांव भिडूकी निवासी वीर सिंह बतौर पीएओ तैनात है। करीब छह माह पूर्व गांव भिडूकी की एक महिला ने बीर सिंह के खिलाफ अश्लील हरकत की शिकायत दर्ज कराई। बाद में पंचायत में दोनों में आपसी राजीनामा हो गया और छह सितंबर को महिला ने हसनपुर पुलिस थाने से अपनी शिकायत वापस ले ली थी। शिकायत के लगभग तीन माह बाद बीर सिंह ने पुलिस थाना हसनपुर को शिकायत दी कि उसके खिलाफ जिस महिला ने छेड़खानी की झूठी शिकायत दी थी उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। ताकि वह भविष्य में कोई झूठा आरोप नहीं लगा सके। बीरसिंह ने महिला के साथ-साथ उसके पति को भी नामजद किया।
सात दिसंबर को पुलिस ने बीर सिंह और दूसरे पक्ष को थाने में बुलाया। मामले की जांच करने के लिए डीएसपी होडल राजबीर सिंह दहिया आए हुए थे। उन्होंने जांच के बाद कहा कि दोनों पार्टियों के खिलाफ 107-151 की कार्रवाई की जाएगी। दोनों पार्टियों को डीएसपी के आदेशानुसार पुलिस थाने में बैठा लिया गया। लेकिन कुछ समय बाद गांव वाले दोनों पार्टियों को आपसी रजामंदी की बात कह कर ले गए। इसके बाद बीरसिंह ने दिल्ली जाकर पूरे मामले से सांसद मेनका गांधी को अवगत करवाया। सांसद मेनका गांधी ने इस बारे में गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर हसनपुर पुलिस थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा।
बीर सिंह ने पत्र लिखकर मानवाधिकार आयोग, सीएम भूपेंद्र सिंह हुडडा, डीजीपी श्रीनिवास वशिष्ठ, गृह मंत्रालय को न्याय की गुहार लगाई है। मेनका गांधी ने हरियाणा के गृह सचिव को बीते 16 दिसंबर को पत्र लिखकर पीएसओ बीर सिंह के साथ हुई इस घटना का जिक्र किया है।
थाना प्रभारी हसनपुर मौहम्मद इलियास ने बताया उन्होंने न तो किसी से रिश्वत ली है और न ही मारपीट की है। इस संबंध में एसपी राकेश कुमार ने कहा कि इस मामले की जांच की जा रही है। मामले की जांच डीएसपी होडल को सौंपी हुई है। जांच के बाद ही कार्रवाई की जाएगी। पीएसओ बीर सिंह के भाई बिरेंद्र सिंह ने बताया कि उसके भाई को तीन घंटे तक अवैध रूप से हवालात में बंद करके रखा गया था।