शराब की बोतल लाने से मना करने पर युवक को जलाने के आरोपी कांस्टेबल मंजीत को पुलिस अधिकारियों ने बर्खास्त कर दिया है।
पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापे मार रही है, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लग पाया है। वहीं, झुलसे हुए युवक इंद्रजीत को गंभीर हालत की वजह से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।
एक और चश्मदीद के बयान से नया मोड़
इस मामले में शुक्रवार को नया मोड़ आ गया। घटनास्थल के नजदीक होटल पर कार्यरत एक कर्मचारी ने यह कहकर मामले को उल्टा फेर दिया है कि इंद्रजीत ने स्वयं पेट्रोल छिड़कर आत्मदाह का प्रयास किया था। वहीं, कबाड़ी के दुकान के संचालक और इंद्रजीत के मालिक धर्मेंद्र ने आत्मदाह की बात को सिरे से खारिज कर दिया है। धर्मेंद्र ने कहा कि पुलिस कर्मचारी ने ही इंद्रजीत को जलाया है। वहीं, जांच अधिकारी शकुंतराज ने दावा किया कि घायल पर किसी पुलिस कर्मचारी ने समझौता करने का दबाव नहीं बनाया है। मामले की जांच की जा रही है।
यह है मामला
धारूहेड़ा के हरि नगर निवासी 23 वर्षीय इंद्रजीत धारूहेड़ा में धर्मेंद कबाड़ी के यहां काम करता है। इंद्रजीत ने अस्पताल में वीरवार कोे दिए अपने बयान में आरोप लगाया था कि 22 अक्टूबर की रात लगभग आठ बजे कांस्टेबल मंजीत ने उससे शराब के लिए पैसे मांगे और बोतल लाने को कहा। उसके मना करने पर उसने पेट्रोल छिड़कर उसे आग लगा दी। उसने आरोप लगाया था कि मंजीत अकसर दुकान पर शराब के लिए पैसे एेंठने आता था। पीड़ित पक्ष की ओर से आरोप लगाया कि 22 अक्तूबर को ही पुलिस के संज्ञान में यह मामला ला दिया गया था, लेकिन मामला 24 अक्तूबर को दर्ज किया गया। पुलिस उन पर समझौता करने के लिए दबाव बनाती रही।
उठे कई सवाल
दो दिन बाद मामला क्यों दर्ज किया गया ?
आत्मदाह की कोशिश का आरोप लगाने वाला तीन दिन तक चुप क्यों बैठा था?
कहीं यह आरोपियों की ओर से प्लान किया गया जाल तो नहीं ?
अगर इसमें सच्चाई है तो इसकी वजह क्या है, कबाड़ी क्यों झूठ बोल रहा है?
शुक्रवार को आरोपी पुलिसकर्मी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है, जल्द ही उसकी गिरफ्तारी हो जाएगी।
- पंकज नैन, एसपी, रेवाड़ी