हरियाणा के जिला सिरसा के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संगीता राय की अदालत ने बुधवार को पिपली हत्याकांड के 14 आरोपियों में से 12 को दोषी करार देते 10-10 साल कैद की सजा सुनाई है।
दो आरोपियों को सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। यह हत्याकांड 6 जून 2012 को हुआ था।
अभियोजन के अनुसार कालांवाली थाना क्षेत्र के गांव पिपली निवासी शेर सिंह 6 जून 2012 शाम को अपने खेतों की ओर जा रहा था।
शेर सिंह गांव में ढाबी पुलिया के समीप पहुंचा था कि गांव के ही अमृत पाल ने उस पर अपने साथियों राम सिंह, देवी बलदेव, जंटा सिंह, आजाद सिंह, बलकरण, बीरबल, काका सिंह, लाभ सिंह, गुलाब सिंह, बलजीत सिंह, रणजीत सिंह, गुरदीप सिंह और कृष्ण कुमार के साथ लाठियों से हमला कर दिया।
शेर सिंह और अमृत पाल के बीच रंजिश चली आ रही थी। हमला इसी रंजिश का नतीजा था। हमले में शेर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया।
परिजनों ने घायल शेर सिंह को उपचार के लिए सामान्य अस्पताल में दाखिल करवाया। चिकित्सकों ने शेर सिंह की गंभीर हालत को देखते हुए उसे चंडीगढ़ पीजीआई रेफर कर दिया।
कालांवाली थाना पुलिस ने सात जून को सभी हमलावर आरोपियों के खिलाफ जानलेवा हमला करने का मामला दर्ज कर लिया था। 11 जून 2012 को शेर सिंह की मौत हो गई थी।
कालांवाली पुलिस ने मृतक शेर सिंह के पुत्र निक्का सिंह कीशिकायत और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आरोपी अमृत पाल, राम सिंह, देवी बलदेव, जंटा सिंह, आजाद सिंह, बलकरण, बीरबल, काका सिंह, लाभ सिंह, गुलाब सिंह, बलजीत सिंह, रणजीत सिंह, गुरदीप सिंह व कृष्ण कुमार के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करके सभी आरोपियों को गिरफ्तार करके अदालत में पेश किया था।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने बलकरण और बीरबल को सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया।