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कब बनेंगी एडहॉक कमेटियां, सवाल गंभीर है पर जवाब पता नहीं

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पानीपत। एडहॉक कमेटियां कब बनेंगी, सवाल गंभीर है पर जवाब किसी को पता नहीं। नगर निगम चुनाव के बाद शहर की सरकार बने करीब पौने तीन वर्ष होने वाले हैं, लेकिन अभी तक नगर निगम की एडहॉक कमेटियां नहीं बनाई जा सकीं हैं। इतना ही नहीं निगम के इस कार्यकाल के पहले के पांच साल का कार्यकाल भी बगैर एडहॉक कमेटियों के गुजार दिया गया अर्थात करीब पौने आठ साल से शहर में एडहॉक कमेटियों का गठन ही नहीं किया गया।
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इनके नहीं बनने से शहर का विकास प्रभावित हो रहा है। एडहॉक कमेटियों न बनने से कई पार्षदों में नाराजगी हैं। निगम की इस कार्यकाल को पूरा होने में आधे से भी कम वक्त बचा है, जबकि निगम एक्ट के अनुसार अब तक इन कमेटियों का गठन कर इनका संचालन शुरू हो जाना चाहिए था। हालांकि इस पर फौरी तौर पर कार्रवाई जरूर की गई, जो सिरे नहीं चढ़ी। महापौर अवनीत कौर ने अपनी और निगम जनप्रतिनिधियों की तरफ से पार्षदों के नाम तय कर शहरी विधायक प्रमोद विज को भेज दिए थे, लेकिन इन पर विचार विमर्श नहीं हुआ।
एडहॉक कमेटियां सदन के बाद सर्वोच्च, पार्षदों की सुनवाई नहीं
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि एडहॉक कमेटियां न बनने से विकास कार्यों की रफ्तार धीमी है, इतना ही नहीं लोगों की समस्याओं का निदान नहीं हो रहा। निगम पार्षदों की फरियाद सुनकर हल निकलाने की बजाय निगम अधिकारी उदासीन बने रहते हैं। उनकी सुनवाई तक नहीं करते। जबकि निगम सदन के बाद एडहॉक कमेटियां दूसरे स्थान पर सर्वोच्च शक्ति में गिनी जातीं हैं। इनके निर्णय अधिकारियों को मानने ही पड़ते हैं। अवमानना पर अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई भी हो सकती है।
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नियम एक्ट में एडहॉक कमेटियां हैं अनिवार्य
निगम एक्ट के अनुसार नगर निगम में कई प्रकार की एडहॉक कमेटियों का गठन अनिवार्य होता है। इनमें भवन निर्माण, फाइनेंस, इंफोर्समेंट, सफाई, बिजली और डिस्पोजल की कमेटियां बनाई जाती हैं। हर कमेटी में चार से पांच पार्षद होते हैं। हर एक कमेटी का चेयरमैन, एक वाइस चैयरमेन और तीन सदस्य बनाए जाते हैं। जिस काम के लिए कमेटी गठित की जाती है, उस काम से संबंधित किसी भी प्रकार का निर्णय लेने में कमेटी सक्षम होती है। कमेटी का गठन करने के बाद इसे मंडल आयुक्त के पास अनुमति के लिए भेजा जाता है। अनुमति के बाद कमेटी बन जाती हैं।
कोई नेता रुकवा रहा सब कमेटियां, मंशा समझ से बाहर
कोई नेता इन सब कमेटियों को बनने से रुकवा रहा है। उसकी क्या मंशा है, क्यों ये कमेटियां बनने नहीं दी जा रहीं, ये सभी पार्षदों के सवाल हैं। निगम में एकतरफा शक्ति के साथ ज्यादा हस्तक्षेप करना भी उचित नहीं है। अगर कमेटियां बनती हैं तो इसमें सभी की भलाई है। सब कमेटियों का गठन तो पहले ही हो जाना चाहिए था। - संजीव दहिया, पार्षद, वार्ड नंबर 21
सब कमेटियां न बनने से पार्षदों में है नाराजगी
सब कमेटियां न बनने से कई पार्षदों में नाराजगी है। इनकी शिकायत भी मेरे पास आ चुकी है। सब कमेटियां तो बननी ही चाहिए। इसके लिए विशेष तौर पर विधायक और मेयर से बातचीत की जाएगी। जल्द से जल्द इनको बनवाया जाएगा। इनसे शहरवासियों की अधिकतर समस्या का निदान होगा। - अशोक कटारिया, पार्षद वार्ड नंबर 7
पूरी नाराजगी है, क्योंकि हमारे हाथ हैं खाली
सब कमेटियां न बनने से पार्षदों में पूरी नाराजगी है। निगम में काम हमारे होते नहीं, अधिकारी हमारी सुनते नहीं, यहां तक की निगम सदन की बैठक तक में हमें तो बोलने तक नहीं दिया जाता। तो फिर लोगों को सुविधाएं या विकास कैसे होगा। शहर की सत्ता की पावर का जबरदस्त केंद्रीयकरण हो रहा है। इसमें बदलाव की आवश्यकता है, ताकि लोगों के काम हो सकें। - अनिल बजाज, पार्षद, वार्ड नंबर 5
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